संवाद सूत्र, मुनस्यारी : तीन दिवसीय मुनस्यारी महोत्सव के दूसरी सांस्कृतिक संध्या यादगार रही। लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत बग्वाल का मंचन मुनस्यारीवासियों को खूब भाया तो दिन में स्कूली बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम में होकरा की छात्राओं द्वारा किए गए छोलिया नृत्य को देख कर दर्शक मुग्ध हो गए। महोत्सव में बढ़ ही भीड़ को देखते हुए प्रशासन की सहमति पर महोत्सव की अवधि एक दिन बढ़ा दी है। महोत्सव का समापन बुधवार की रात्रि केा होगा।

सोमवार की रात तो दूसरी सांस्कृतिक संध्या काफी यादगार रही। प्रह्लाद मेहरा एंव टीम और गौरव जायसवाल अल्मोड़ा की टीम ने एक से बढ़कर एक रंगारंग कार्यक्रम पेश किए। इस दौरान चम्पावत के देवीधूरा में होने वाली बग्वाल का मंचन दर्शकों को खूब भाया। सोमवार की रात्रि को मुनस्यारी में तापमान एक डिग्री से नीचे था इसके बाद भी दर्शक रात्रि एक बजे तक कार्यक्रम देखने डटे रहे। इस दौरान महोत्सव कमेटी के पदाधिकारियों सहित गणमान्य लोग और भारी संख्या में लोग जमे रहे।

तीसरे दिन मंगलवार को आयोजन स्थल जोहार क्लब मैदान में सुबह खेलकूद सहित अन्य प्रतियोगिताएं हुई। दोपहर के आसपास से विद्यालयों की सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं हुई । प्रतियोगिताओं का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय डॉ. एमपी नगवाल ने दीप प्रज्ज्वलित करते हुए किया। इस दाौरान जीआइसी होकरा की छात्राओं ने प्रसिद्ध छोलिया नृत्य पेश किया। शिक्षक जितेंद्र सिंह अजगला के संरक्षण में प्रस्तुत बालिकाओं का छोलिया नृत्य बेहद सराहनीय रहा। विदित हो कि ये छात्राएं इस नृत्य को प्रदेश की राजधानी देहरादून में गणतंत्र दिवस पर भी प्रस्तुत कर चुकी हैं। उनके इस प्रस्तुति की फोटो को यूनिक कैलेंडर में भी स्थान मिल चुका है।

इस मौके पर सशिमं, विविमं, पब्लिक स्कूल, जीआइसी, जीजीआइसी नमजला के बच्चों ने आकर्षक कार्यक्रम पेश किए। कार्यक्रमों का संचालन लक्ष्मण पांगती, तब्बू मर्तोलिया ने किया। इस मौके पर मेला कमेटी के अध्यक्ष राजू पांगती, प्रधानाचार्य विविमं भगत सिंह बोरा, बंशीधर जोशी, केदार मर्तोलिया आदि मौजूद थे। इधर महोत्सव में बढ़ती भीड़ को देखते हुए मेलावधि एक दिन बढ़ा दी गई है। अब मेला बुधवार की रात्रि तक चलेगा। महोत्सव में व्यापारिक गतिविधियां दस दिसंबर तक रहेंगी।

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नमकीन चाय ज्या सबसे पसंदीदा

महोत्सव में जहां स्थानीय उत्पादों की धूम मची है वही ऊनी वस्त्र व जम्बू, गंधारण और अन्य विशेष सामानों की खूब बिक्री हो रही है। नमकीन चाय ज्या की सबसे अधिक मांग है। उच्च हिमालय में इसी चाय का प्रयोग किया जाता है। इस चाय में जड़ी बूटी के अलावा नमक डाला जाता है। इसकी तासीर गर्म होती है। कड़ाके की ठंड में भी ज्या पीने के बाद शरीर में गर्मी बनी रहती है। यहां पर कड़ाके की ठंड के चलते ज्या की मांग सबसे अधिक है।

Posted By: Jagran

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