संवाद सूत्र, धारचूला: चीन सीमा को जोड़ने वाली सड़क चट्टान टूटने से बाधित हो गई है। व्यास घाटी के कई गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क भंग हो गया है।

सीमांत क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से एलागाड़ पावर हाउस के पास विशाल चट्टान दरक गई। चट्टान का मलबा तवाघाट-लिपूलेख सड़क पर जमा हो गया। भारी बोल्डर सड़क पर जमा हो जाने से आवागमन ठप हो गया है। मलबा इतना अधिक है कि बंद पड़े मार्ग को पैदल पार करना भी संभव नहीं हो पा रहा है। जरू री कार्यों के लिए आवागमन करने वाले लोगों को खतरनाक चट्टानों पर चढ़कर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। व्यास घाटी के दर्जनों गांव सड़क बंद होने से अलग-थलग पड़ गए हैं। चीन सीमा पर तैनात सुरक्षा बल भी इसी सड़क से आवागमन करते हैं।

सड़क पर बोल्डर हटाने के लिए मात्र एक मशीन उपलब्ध है। जिसे दूसरे क्षेत्र में तैनात किया गया है। मजूदरों के जरिए बोल्डर हटाने का कार्य चल रहा है, जिसमें लंबा समय लगने की उम्मीद है। परेशान क्षेत्रवासियों ने एलागाड़ के पास आया मलबा शीघ्र हटाए जाने की मांग प्रशासन से की है। बता दें व्यास घाटी से लगी दारमा घाटी को जोड़ने वाली सड़क पिछले 90 दिनों से बंद पड़ी है। जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद भी सड़क नहीं खुल पा रही है। सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाली दोनों सड़कों के बंद हो जाने से बड़ी आबादी परेशान है। ========= जिले की नौ सड़कों से नहीं हटा मलबा, हजारों की आबादी परेशान पिथौरागढ़: मानसून काल लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन महीनों से बंद पड़ी नौ सड़कें अभी भी नहीं खुल पाई हैं। धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्र में बंद पड़ी सड़कों के नहीं खुल पाने से हजारों की आबादी परेशान है।

जिले की सीमांत तहसील धारचूला की दारमा और व्यास घाटी को जोड़ने वाली सड़कें बंद हैं। कई गांव अलग-थलग पड़े हैं। मदकोट- बौना, हुपली-सुंदरीनाग, मंसूरीकांडा- होकरा, बांसबगड़- पंद्रहपाला, छिरकिला- जम्कू, तवाघाट- घटियाबगड़ सड़कें बुधवार को भी नहीं खुल पाई। सड़कें बंद होने से इन क्षेत्रों के लोग जान हथेली पर रखकर पैदल आवागमन करने को मजबूर हैं। बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में लोगों को खासी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। गांवों तक राशन पहुंचाने के लिए पूर्ति विभाग को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। सड़कों को खोलने के लिए जगह- जगह आंदोलन हो रहे हैं। जिलाधिकारी लगातार निर्देश जारी कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर हालत नहीं बदल रहे हैं। लंबे समय से अलग-थलग पड़े लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।

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