झूलाघाट (पिथौरागढ़), जेएनएन : भारत-नेपाल के मध्य रोटी-बेटी के संबंधों पर कोरोना का ऐसा ब्रेक लगा कि आवाजाही ही नहीं कारोबार भी ठप हो गया। अंतरराष्ट्रीय पुलों के निकट वाले भारतीय बाजारों से थोक व फुटकर में खरीदारी करने वाले नेपाली व्यापारी यहां का उधार नहीं चुका सके हैं। ऐसे में भारतीय व्यापारियों का करीब 56 लाख से अधिक बकाया सात माह से बना हुआ है।

नेपाली ग्राहक व छोटे दुकानदार प्रतिमाह भारत के झूलाघाट बाजार से सामान खरीद कर ले जाते हैं। नियमित लेनदेन के चलते वे पुरानी उधारी चुका कर नया सामान ले जाते हैं। मगर कोरोना और उसके बाद सीमा बंद होने का असर ही कहेंगे कि भारत के 150 व्यापारियों की नेपाल के बैतड़ी,बजांग, बाजुरा और डडेलधुरा में ही 56 लाख रुपये की रकम फंसी है। सात माह से पुल बंद होने से न तो नेपाल के ग्राहक भारत आ पा रहे हैं और न भारत के व्यापारी अपने धन की वसूली के लिए नेपाल जा पा रहे हैं।

झूलाघाट बाजार से सीमावर्ती नेपाल के लोगों का लेन-देन साल भर रहता है। नेपाल में खाद्यान्न, कपड़ा, इलेक्ट्रानिक व अन्य घरेलू सामान भारत के बाजारों से ही खरीदा जाता है। यह सब वर्षो से होता आया है। भारतीय व्यापारियों और नेपाल के ग्राहकों के बीच आपसी विश्वास के कारण ही वहां के दुकानदार व ग्राहकों को उधार पर ही सामान दिया जाता रहा है।

उद्योग व्यापार मंडल के जिला उपाध्यक्ष एवं झूलाघाट के व्यापारी संजीव जोशी का कहना है कि सात माह से न तो व्यापारियों का अपना पुराना भुगतान मिला है और सीमा बंद होने से व्यापार भी बंद है। नेपाली पेंशनर्स के लिए तो दोनों सरकारें पुल खोल लेती हैं। भारतीय व्यापारियों की मांग है कि हमेशा के लिए पुल खोला जाए ताकि भारत-नेपाल के बीच पूर्ववत स्थिति बनी रहे।

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आज नहीं खुलेगा झूलाघाट पुल

बुधवार को नेपाली पेंशनर्स के लिए धारचूला और जौलजीबी पुल खुलेंगे। झूलाघाट पुल खोलने के कोई आदेश नहीं मिले हैं। दरअसल झूलाघाट के व्यापारियों ने पुल हमेशा खोलने की मांग की थी। साथ ही केवल पेंशनर्स के लिए पुल खोलने पर विरोध का एलान भी कर रखा है। ऐसे में प्रशासन ने सरकार को इस स्थिति से अवगत करा दिया है।

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