संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़: महिला स्वास्थ की बेहतरी को लेकर की गई राजनीतिक दलों की कोरी घोषणाएं जिले की आधी आबादी पर भारी पड़ रही हैं। जिले के महिला चिकित्सालय में क्षमता से डेढ़ गुना महिलाएं भर्ती हैं। बेड के अभाव में इन महिलाओं को बैंच पर ही उपचार लेना पड़ रहा है।

हरगोविंद पंत महिला चिकित्सालय में कुल 62 बेड स्वीकृत हैं, लेकिन हाल के वर्षो में आयुर्वेद सहित कई नई विंग अस्पताल में खोली गई हैं। जिसके लिए मरीजों के लिए बनाए गए कक्षों का उपयोग किया गया है, इससे अस्पताल की क्षमता सिकुड़ कर मात्र 42 बेड की रह गई है। महिला अस्पताल में जिले के आठ विकास खंडों की महिला आबादी के साथ ही पड़ोसी जनपद चंपावत और पड़ोसी देश नेपाल के महिला मरीजों का भी दबाव बना हुआ है। हर रोज 15 से 20 महिलाएं प्रसव के लिए महिला चिकित्सालय पहुंच रही हैं। प्रसव के बाद महिलाओं को दो से तीन दिन तक रखना पड़ता है। इसके लिए अलावा टाइफाइड, पीलिया से पीड़ित महिला मरीज भी अस्पताल में भर्ती हैं। पिछले एक पखवाड़े से अस्पताल में भर्ती महिलाओं की संख्या का आंकड़ा 60 से नीचे नहीं उतर रहा है। मजबूरी में एक ही बेड पर दो-दो महिलाओं को भर्ती करने के अलावा अस्पताल में तीमरदारों के लिए लगी बैंचों को जोड़कर बेड बनाकर महिला मरीजों ंको भर्ती करना पड़ रहा है। महिलाओं के साथ उनके तीमरदार भी खासे परेशान हैं। जनमंच के जिला संयोजक भगवान रावत ने कहा है कि आधी आबादी को महिला चिकित्सालय में खासी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। राजनैतिक दलों की इस महत्वपूर्ण मसले पर खामोशी गंभीर मसला है। उन्होंने कहा है कि अस्पताल की व्यवस्थाएं अविलंब नहीं सुधारी जाती हैं तो जनमंच नगर के लोगों को साथ लेकर सड़कों पर उतरेगा। जिला चिकित्सालय में इस समय महिला मरीजों का भारी दबाव है। बेड कम पड़ने के चलते बेंच पर महिलाओं को उपचार देना पड़ रहा है। व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ाए जाने की जरू रत है। समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

-डा.निर्मला पुनेठा, पीएमएस, महिला चिकित्सालय पिथौरागढ़

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