पिथौरागढ़, [जेएनएन]: शनिवार को नैनीताल जिले के हैड़ाखान मार्ग पर सड़क दुर्घटना में काल कलवित हुए प्रसिद्ध लोक गायक पप्पू कार्की का थल में रामगंगा नदी तट पर अंतिम संस्कार किया गया। रविवार को शोक में पांखू, थल बाजार बंद रहे।

शनिवार की देर सायं दिवंगत लोकगायक पप्पू काकी का शव हल्द्वानी से पांखूंं स्थित उनके पैतृक गांव सेलावन को रवाना हुआ। शव रविवार की सुबह गांव पहुंचा। शव के घर पहुंचते ही मां कमला देवी और पत्नी कविता कार्की बेसुध हो गए। ग्रामीणों ने उन्हें संभाला और ढांढस बंधाया। शव पहुंचने की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों और पांखू, थल, बेरीनाग से लोग पहुंचने लगे।

प्रेमनगर से थल तक पांच किमी शवयात्रा पैदल निकली। पिथौरागढ़, डीडीहाट, मुनस्यारी क्षेत्र से आए लोग शवयात्रा में शामिल होते रहे। थल में रामगंगा नदी तट पर अंतिम संस्कार हुआ। शवयात्रा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जागेश्वर विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष दल बहादुर सिंह बाफिला, जिपं सदस्य सुंदर महरा, ऊर्जा निगम के अधीक्षण अभियंता नरेंद्र सिंह टोलिया आदि मौजूद रहे। रविवार को शोक में पांखू, थल बाजार बंद रहे।

 

ईजा तूं कुंछै त्वै कभै नि छोड़ू, आज किले छोडि़ गिंछे

'ईजा तूू कौछिए त्वे कभै नि छोड़ू, आज किलै छोडि़ गेछै, अब मैं कै दगाड़ रौंल' (तू तो कहता था मैं तुझे कभी नहीं छोड़ूंगा, फिर क्यों आज छोड़ कर चला गया, अब मैं किसके साथ रहूंगी...)। अपने कलेजे के टुकड़े की अंतिम विदाई के वक्त लोक गायक पप्पू कार्की की मां कमला देवी के ये शब्द बार-बार निकल रहे थे। 

 

शनिवार की सुबह नैनीताल जिले के हैड़ाखान मार्ग पर दुर्घटना के चलते काल के मुंह में समाए प्रसिद्ध लोकगायक पप्पू कार्की का पार्थिव शरीर रविवार की सुबह साढ़े सात बजे पैतृक गांव सेलावन पहुंचा। पहले से खबर सुनने के बाद बेहोश हो चुकी मां की शव पहुंचने के बाद तंद्रा टूटी। 

मां कमला देवी ने पुत्र के अंतिम दर्शन किए और लिपटकर रोने लगी। उनके रुंदन से पूरा गांव और इस मौके पर जुटे लोगों की आंखें नम हो गईं। अपने चहेते कलाकार के नहीं रहने का दर्द सभी के चेहरे पर नजर आ रहा था। 

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Posted By: Raksha Panthari