संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़ : पहाड़ की सड़कों को मक्खन बना देने के राजनैतिक दावों की हकीकत सड़कें खुद ही बयां कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़कों की तो कौन कहे मुख्य सड़कों के हालात ही बेहद खराब है। ऐसा नहीं है कि इन सड़कों पर पैसा खर्च नहीं किया गया है, करोड़ों रुपये खर्चने के बाद कई सड़कें पहले से ही बदतर हालात में पहुंच गई हैं।

पिथौरागढ़ जिले की तीन विधानसभाओं को जोड़ने वाली सातशिलिग-थल-मुनस्यारी सड़क प्रदेश में सड़कों के नाम पर होने वाली बंदरबांट का खुला उदाहरण है। सरकार ने एडीबी से लोन लेकर 40 करोड़ रुपये सातशिलिग-थल सड़क में खर्च किए। यह धनराशि कांग्रेस शासनकाल में खर्च की गई। भारी भरकम धनराशि से सड़क पर डामरीकरण, नाली निर्माण और संकरे मोड़ों को चौड़ा किया जाना था, लेकिन काम की गुणवत्ता निम्न स्तर की रही। जनता के विरोध के बाद वर्तमान जिलाधिकारी आशीष चौहान ने पिथौरागढ़ में सीडीओ रहते हुए इसकी जांच की भी की, लेकिन जांच रिपोर्ट प्रदेश में भाजपा के सरकार बनने के बाद भी सार्वजनिक नहीं हुई, कार्रवाइ तो दूर की बात। सड़क का काम पूरा होने के एक वर्ष के भीतर ही सड़क फिर पुरानी स्थिति में पहुंच गई। एक वर्ष पूर्व जनता में आक्रोश गहराने लगा तो एडीबी पीडब्ल्यूडी ने क्षतिग्रस्त हिस्सों पर आरसीसी कराई, लेकिन कुछ ही समय में हालात फिर पहले जैसे ही हो गए हैं। खड़किटया मेलापानी के पास सड़क का डामर बह जाने से गड्ढा बन गया है, जिसमें लंबे समय से पानी भरा हुआ है। इस हिस्से में सिर्फ एक पगडंडी बची हुई है। दोपहिया वाहन चालकों को इसकी पगडंगी पर संतुलन साधना पड़ रहा है। थल से आगे पर्यटन नगरी मुनस्यारी को जोड़ने वाली यह सड़क तीन विधानसभा क्षेत्रों में बंटी है। इन तीन विधानसभाओं में दो विधायक भाजपा के और एक विधायक कांग्रेस के हैं। डीडीहाट और मुनस्यारी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत इस सड़क की हालत सबसे ज्यादा खराब है।

Edited By: Jagran