संवाद सूत्र , धारचूला : चार हजार मतदाताओं वाले रांथी गांव के ग्रामीणों को मतदान के लिए प्रशासन मना नहीं सका। इधर इसी क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों के ग्रामीणों भी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दे दी है। जिससे प्रशासन की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। चुनाव बहिष्कार करने वाले तल्ला दारमा के गांव उच्च और मध्य हिमालय के केंद्र में स्थित अति दुर्गम गांव हैं।

इस संबंध में छह गांवों के ग्रामीण सड़क, स्वास्थ्य और संचार को लेकर मतदान बहिष्कार का एलान कर चुके हैं। युवा एकता शक्ति संगठन के बैनर तले ग्रामीणों ने इस बार मतदान नहीं करने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि देश डिजिटल युग में पहुंच चुका है परंतु देश में रहते हुए उन्होंने आज तक फोन नहीं देखा है। क्षेत्र तक सड़क की सुविधा नही है। स्वास्थ्य सेवा नहीं होने से आज भी ग्रामीणों को उपचार के लिए टोने , टोटकों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में मतदान का कोई मतलब नहीं रह जाता है। नेतागण चुनाव के समय ग्रामीणों को झूठे आश्वासन दे जाते हैं। अधिकारी, कर्मचारी कभी क्षेत्र में नहीं आते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र दैवीय आपदा की दृष्टि से जिले का सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र है। प्रतिवर्ष मानसून काल और शीतकाल में लोगों की जान जाती है। सड़क, संचार और स्वास्थ की मांग करते -करते जनता थक चुकी है। जिसे लेकर खेत, सुवा, उमचिया, दर, बौगलिंग और यावलदांग के ग्रामीणों के मतदान नहीं करने का निर्णय लिया गया। इन गांवों की आबादी लगभग आठ हजार है और साढ़े तीन हजार के आसपास मतदाता है। बैठक में ग्राम प्रधान उमचिया मान सिंह दुग्ताल, सोबन सिंह, पुष्कर सिंह, हिमांशु सिंह , संदीप सिंह, मन्नू थापा, हरीश रोकाया, खुशाल सिंह , विनोद युवा शक्ति संगठन के अध्यक्ष सुरेश सिंह जेठा, उपाध्यक्ष रमेश बिष्ट, कोषाध्यक्ष कमलेश कुंवर, महासचिव रतन सिंह नेगी, मीडिया प्रभारी महिमन नेगी सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे। उधर मदकोट के बाता गांव के ग्रामीणों ने भी सड़क को लेकर मतदान बहिष्कार का निर्णय लेकर सूचना प्रशासन को दे दी है।

Posted By: Jagran