पिथौरागढ़, [जेएनएन]: चीन और नेपाल सीमा से लगा उच्च हिमालयी क्षेत्र को संचार से जोड़ने की कवायद होने लगी है। उच्च हिमालय में मोबाइल टावरों की सर्वे के लिए भारत संचार निगम लिमिटेड के कर्मी रवाना हो चुके हैं। व्यास, दारमा और चौदास घाटियों में भी आने वाले दिनों में मोबाइल फोन बजने लगेंगे। चीन और नेपाल की तरह ही भारत के सीमा छोर से भी देश, विदेश तक बात हो सकेगी। 

सीमांत जिला पिथौरागढ़ का चीन और नेपाल सीमा से लगे तहसील धारचूला के व्यास, दारमा और चौदास तथा मुनस्यारी का मल्ला जोहार क्षेत्र डिजिटल युग में भी संचार सेवा से वंचित है। धारचूला के व्यास घाटी से ही कैलास मानसरोवर यात्रा और भारत चीन व्यापार संचालित होता है। दारमा के पंचाचूली ग्लेशियर और मल्ला जोहार के मिलम ग्लेशियर , नंदा देवी बेस कैंप जाने वाले पर्यटकों की संख्या सबसे अधिक रहती है।

संचार के अभाव में कैलास यात्रियों से लेकर पर्यटक तक अपनी कुशल क्षेम अपने घरों को नहीं दे पाते हैं। दूसरी तरफ चीन की मोबाइल संचार सेवा भारत की सीमा तक उपलब्ध है तो नेपाल की दो संचार सेवाएं अपने देश के उच्च हिमालय में मोबाइल फोन सेवा विगत कई वर्षों से दे रही है। नेपाल सीमा से लगे भारत के कुछ क्षेत्रों में लोग नेपाल की मोबाइल सेवा का उपयोग करते हैं। दारमा और मल्ला जोहार में यह सब भी संभव नहीं है। साल में छह माह अपने उच्च हिमालयी मूल गांवों में प्रवास करने वाले 31 गांवों के अलावा यहां पर तैनात सेना और आइटीबीपी को भी संचार सेवा की कमी खलती है।

क्षेत्र को संचार सेवा से जोड़ने की मांग को लेकर लगातार जनता आंदोलन करती आ रही है। बीते दिनों तो दारमा के क्षेपंस मनोज नगन्याल साठ किलो वजन के ज्ञापनों की प्रतिलिपियां लेकर जिला मुख्यालय पहुंच गया था। जिनमें सबसे अधिक ज्ञापन सीमा छोर को संचार सेवा से जोड़ने के थे।

सीमा क्षेत्र को संचार सेवा से जोड़ने के लिए अब केंद्र सरकार आगे आ चुकी है। उच्च मध्य हिमालय में एक टावर बीते वर्ष पांगू में लग चुका है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर टावर स्वीकृत किए थे। स्वीकृत टावरों की सर्वे के लिए बीएसएनएल की टीम उच्च हिमालय को रवाना हो चुकी है। जिसे लेकर उच्च हिमालय में रहने वाले लोगों में खुशी व्याप्त है।

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