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परदादा- दादा और पिता के बाद अब बेटा बना लेफ्टिनेंट, चार पीढ़ियों से देश सेवा में जुटा उत्तराखंड का ये परिवार

Published: Sun, 06 Sep 2026 11:14 AM (IST)

पिथौरागढ़ के पारस भट्ट ने ओटीए गया से प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में अधिकारी बनकर अपने परिवार की चार पीढ़ियों की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया है।

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संक्षेप में पढ़ें

संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़। उत्तराखंड के थलकेदार क्षेत्र के रौलियागांव तोक, बेलतड़ी निवासी पारस भट्ट ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी गया से प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में अधिकारी बनकर परिवार की गौरवशाली सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ ही पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।

पारस भट्ट कैप्टन सीएस भट्ट (सेवानिवृत्त) के पुत्र हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गायत्री मेमोरियल पब्लिक स्कूल, वड्डा से प्राप्त की। इसके बाद द एशियन एकेडमी, पिथौरागढ़ से जूनियर हाईस्कूल तथा आर्मी पब्लिक स्कूल से इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की। उन्होंने ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, देहरादून से बीटेक किया।

चार पीढ़ियां सेना से जुड़ी

उनके परिवार की चार पीढ़ियां सेना से जुड़ी रही हैं। पारस से पहले उनके पिता, दादा और परदादा ईएमई में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। परिवार के कई अन्य सदस्य भी भारतीय सेना में योगदान दे चुके हैं।

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बचपन से ही परिवार के सैन्य वातावरण और पूर्वजों की वीरगाथाओं से प्रेरित पारस ने सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य निर्धारित किया था। कठिन परिश्रम और लगन से उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल किया।

परिवार के लिए यादगार पल

ओटीए गया में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान जब लेफ्टिनेंट पारस भट्ट का मेडल उनके दादा-दादी को प्रदान किया गया, तो गर्व और भावुकता से उनकी आंखों में आंसू छलक पड़े। यह पल परिवार के लिए बेहद यादगार रहा। पारस के चाचा दिनेश चंद्र भट्ट अमन सोशल वेलफेयर सोसायटी के कोषाध्यक्ष के रूप में समाजसेवा से जुड़े हैं।

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लेफ्टिनेंट पारस भट्ट की इस उपलब्धि पर पूर्व सैनिकों और क्षेत्रवासियों ने खुशी जताई है। चार पीढ़ियों की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाने वाली उनकी सफलता क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायी है।