संवाद सूत्र, बेरीनाग: सरकार प्रदेश के विकास के तमाम दावे करते रहे, लेकिन धरातल इन दावों की पोल खोल रहा है। अति महत्वपूर्ण योजनाएं भी पैसे के अभाव में लटक गई हैं। योजनाएं निर्धारित समय पर पूरी नहीं हो रही है। जिससे इनकी लागत में इजाफे की भी आशंका है।

गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही पर्यटन नगरी बेरीनाग के लिए पिछली सरकार ने 12.42 करोड़ की लागत से बनने वाली पेयजल योजना को स्वीकृति दी थी। गोरघटिया से लिफ्ट स्कीम के जरिए पानी बेरीनाग पहुंचाने के लिए सरकार 8.42 करोड़ की धनराशि विभाग को जारी कर योजना को अप्रैल 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन योजना निर्धारित समय पर पूरी नहीं हो पाई है। जल निगम के अधिशासी अभियंता अनूप पांडे ने बताया कि योजना में सिविल से संबंधित दस प्रतिशत कार्य अभी बाकी है और मैकेनिकल कार्य जिनमें ट्रांसफार्मर, विद्युत लाइन बिछाने आदि कार्य होना है अभी शुरू नहीं हो पाया है। शासन से मिली धनराशि खर्च हो चुकी है। योजना के लिए स्वीकृत चार करोड़ धनराशि का इंतजार है। धनराशि मिलने पर ही आगे का काम पूरा हो पाएगा। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जानकार बताते हैं कि सितंबर माह में भी योजना का बचा हुआ पैसा मिला तो शेष कार्यो को पूरा करने में एक वर्ष तक का समय लग जाएगा। इन हालात में नगर के लोगों को अगली गर्मियों में भी पेयजल संकट झेलना पड़ेगा। चौथे दिन मिल रहा है नगर के लोगों को पानी

बेरीनाग: नगर के लोगों को वर्तमान में गंभीर पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। विभाग ने पेयजल वितरण के लिए रोटेशन प्रणाली तय कर रखी है, जिसके चलते लोगों को चौथे दिन पानी मिल पाता है। नगर के लोग प्राकृतिक जल स्रोतों से ही अपनी जरू रत पूरी कर पाते हैं। कभी लाइट गुल होने तो कभी योजना में खराबी के चलते लोगों को तमाम दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। नई योजना का अता-पता नहीं

बेरीनाग: पिछले वर्ष गंगोलीहाट भ्रमण के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बेरीनाग- राईआगर के लिए रामगंगा नदी से लिफ्ट पेयजल योजना बनाए जाने की घोषणा की थी, जिसका अब तक कोई अता-पता नहीं है। दोनों योजनाओं के बन जाने के बाद क्षेत्र के लोगों को अगले 50 वर्षो तक पेयजल संकट की समस्या से नहीं जूझना होगा।

Posted By: Jagran