संवाद सूत्र, मुनस्यारी: आपदा के दो माह बाद भी तहसील क्षेत्र के उच्च हिमालय क्षेत्र में व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पाई हैं। मल्ला जौहार क्षेत्र को जोड़ने वाले एकमात्र पुल के दयनीय हालत में पहुंच जाने के साथ ही संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो जाने से आवागमन ठप है। क्षेत्र में पिछले दो माह से राशन नहीं पहुंचा है। इससे क्षेत्र के गांवों में खाद्यान्न संकट गहराने लगा है। तहसील क्षेत्र का लिलम गांव भी अलग-थलग पड़ा हुआ है।

दो जुलाई को आई आपदा से मल्ला जौहार को जोड़ने वाला एकमात्र पुल जिमीघाट दयनीय हालत में पहुंच गया है। इस पुल से आवागमन ठप है। पुल को जोड़ने वाला पैदल मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो चुका है। मल्ला जौहार के दर्जनों गांवों के लोग माइग्रेशन पर इन दिनों अपने मूल गांवों में हैं और घाटी वाले क्षेत्र में आने के लिए उन्हें इसी मार्ग का उपयोग करना पड़ता है। क्षेत्र के गांवों के लिए राशन की आपूर्ति इसी मार्ग से खच्चरों के जरिए होता है। खच्चर मार्ग में आवागमन नहीं कर पा रहे हैं। पिछले दो माह से साईपोल गोदाम में खाद्यान्न नहीं पहुंच सका है। सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र सिंह ने कहा कि जल्द ही क्षेत्र में खाद्यान्न नहीं पहुंचा तो हालत खराब हो सकती है। उन्होंने कहा कि इसी क्षेत्र से लगे लिलम क्षेत्र को जोड़ने वाली चिलमधार पुलिया के बह जाने से यह क्षेत्र भी अलग- थलग पड़ा हुआ है। न्याय पंचायत के अंतर्गत आने वाले दर्जनों गांवों के लोग परेशान हैं। देवेंद्र ने मांग की है कि अविलंब मार्गो और पुलों की हालत सुधारी जाए। नंदाष्टमी में झेलनी पड़ेगी परेशानी

मुनस्यारी: सीमांत क्षेत्र के लोग अगले माह नंदाष्टमी का पर्व मनाने मल्ला जौहार जाएंगे, लेकिन मार्ग की हालत खराब होने से उन्हें खासी परेशानी झेलनी पड़ेगी। वर्ष में एक बार होने वाले इस आयोजन में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग मल्ला जौहार पहुंचते हैं। नंदाष्टमी पर्व के कुछ समय बाद माइग्रेशन शुरू हो जाएगा। उच्च हिमालय गए गांवों के लोगों को घाटी वाले इलाकों में आना होगा। अपने जानवर और घरेलू सामान के साथ घाटी में आ पाना लोगों के लिए संभव नहीं होगा।

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