संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़ : पिथौरागढ़ और चंपावत जनपद के साथ ही उत्तर भारत के तमाम शहरों के लिए जीवनदायिनी सरयू के अस्तित्व पर ऑल वेदर का मलबा संकट खड़ा कर रहा है। चट्टानों की कटिंग का मलबा सीधे नदी तटों पर गिराया जा रहा है। इससे नदी के पाट संकरे होने लगे हैं। ज्यादा बारिश होने की स्थिति में सरयू बड़ा संकट खड़ा कर सकती है। जागरू क लोगों ने अब इस मामले को पीएम पोर्टल पर डालने का निर्णय लिया है।

पिछले दो वर्ष से पिथौरागढ़ से टनकपुर तक की सड़क को ऑल वेदर सड़क बनाया जा रहा है। इसके लिए सड़क की चौड़ाई बढ़ाई जा रही है। चौड़ाई से निकला मलबा सीधे क्षेत्र में बहने वाली सरयू नदी की ओर धकेला जा रहा है। नदी के दोनों पाट मलबे से पट गए है। इस मलबे को खिसकर नदी में ही समाना है। नियमानुसार मलबे के निस्तारण के लिए डंपिंग जोन बनाए जाने हैं, लेकिन एनएच ने नाममात्र के ही डंपिंग जोन बनवाए हैं। बड़ी आबादी के लिए जीवनदायिनी सरयू नदी के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे से पर्यावरणविद खासे चिंतित हैं। भूगर्भ वैज्ञानिक डा.धीरेंद्र जोशी का कहना है कि मलबा नदी में समा रहा है, जिससे नदी में गाद बढ़ेगी। नदी का जल्द स्तर पर बढ़ने पर नदी तटीय इलाकों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती है। युवा नेता ऋषेंद्र महर ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इस पूरे मामले को प्रमाण सहित पीएम पोर्टल पर डाला जाएगा। इसके बाद भी एनजीटी मामले का संज्ञान नहीं लेता है तो जनपद में इसके खिलाफ आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

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