पिथौरागढ़, [जेएनएन]: भारत- चीन व नेपाल सीमा से सटे पिथौरागढ़ जिले के दुंगदुंग व मालपा में सोमवार तड़के बादल फटे। इससे उफनाए स्थानीय नालों ने करीब 18 किमी क्षेत्र में व्यापक तबाही मचाई। मालपा व घटियाबगड़ में सेना के ट्रांजिट कैंप पूरी तरह तबाह हो गए। मलबे में दबकर 17 लोगों की मौत हो गई जबकि 25 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों में सेना के एक जेसीओ भी शामिल हैं जबकि लापता लोगों में एक जेसीओ समेत पांच जवान बताए जा रहे हैं। वहीं मालपा में अभी भी रास्ता बंद है, आइटीबीपी के जवानों के जरिए लगातार रेस्क्यू अभियान जारी है। माना जा रहा है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।   

बादल फटने से प्रभावित मालपा और घटियाबगड़ में खोज एवं बचाव का कार्य जारी है। मालपा तक नजंग के पास मार्ग बंद होने से नीचे से पहुंंच पाना मुश्किल है। उपर की ओर तैनात एसएसबी, आईटीबीपी  और गर्ब्यांग गूंजी आदि स्थानों के युवक राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं। आशंका है कि लापता और मृतक लोगों का आंकड़ा बढ़ सकता है। 

लापता हुए लोगों के काली नदी मेंं बहने की आशंका है। क्षेत्र में अभी तक प्रशासन का कोर्इ भी अधिकारी नहीं पहुंच पाया है। वहीं शासन द्वारा भेजा गया हेलीकॉप्टर भी पिथौरागढ़ में है। इससे मौसम के साफ होते ही मालपा से शवोंं को लाया जाएगा।

वहीं घटियाबगड़ में सेना, एसएसबी के जावान राहत और खोज में जुटे हैंं। राहत-बचाव के दौरान एक जेसीओ और दो जवान सोमवार को सुरक्षित मिले। इन तीनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।, जबकि एक जेसीओ और पांच जवान अभी भी लापता हैंं। वहीं शासन द्वारा आज घटियाबगड़ में वायरलेस सिस्टम लगाया जा रहा है। फिलहाल क्षेत्र में मौसम खराब है। 

इससे पहले सड़क व पुल बह जाने के कारण प्रशासन व राहत टीमें अब भी रास्ते में ही फंसी हैं। स्थानीय लोगों के साथ सेना व आइटीबीपी के जवान राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। मालपा से लेकर घटियाबगड़ तक तीन होटल, चार दुकानें और सिमखोला में एक मोटर पुल बह गया है। घटियाबगड़ में सेना के ट्रांजिट कैंप का वजूद समाप्त हो गया है। सेना के तीन ट्रकों समेत आधा दर्जन वाहन व सेना का साजो सामान बह गया है। अलबत्ता प्रशासन ने महज छह की मौत और 11 लोगों के लापता होने की बात कही है।

सोमवार तड़के करीब 2.45 बजे सात हजार फीट की ऊंचाई स्थित कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर दुंगदुंग में बादल फटने की पहली घटना हुई। इसी दौरान मालपा में भी बादल फट गया। जिससे ननगाड़ और ठुलगाड़ व मालपा नाला उफान पर आ गए। इन नालों के प्रवाह से सिमखोला नदी विकराल हो गई। नतीजतन मालपा में तीन होटल बह गए। जबकि घटियाबगड़ में आर्मी ट्रांजिट कैंप तबाह हो गया। कैंप में सो रहे जवानों ने पहाड़ी पर चढ़कर जान बचाई। 

इस दौरान सेना के तीन ट्रक सहित आधा दर्जन अन्य वाहन व सेना का साजो सामान भी बह गया। सैन्य सूत्रों के अनुसार सेना के दो जेसीओ व पांच जवान अब भी लापता हैं। मालपा व घटियाबगड़ में अभी तक मलबे से छह शव ही बरामद किए जा सके हैं। कुछ क्षत-विक्षत अंग भी मिले हैं। बरामद शवों में एक सेना का जेसीओ बताया जा रहा है। शवों के क्षत-विक्षत होने से शिनाख्त नहीं हो पा रही है। मृतकों में सेना के कुछ और जवान भी शामिल हो सकते हैं। मालपा व घटियाबगड़ में 25 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।

दुर्गम क्षेत्र होने से खोजकार्य प्रभावित 

घटना स्थल पिथौरागढ़ मुख्यालय से 145 व धारचूला तहसील से करीब 45 किमी दूर अति दुर्गम में है इस क्षेत्र में संचार सेवा न होने और पुल व सड़कें बह जाने से सूचनाओं का आदान-प्रदान भी नहीं हो पा रहा है। घटियाबगड़ से मालपा नौ किमी पैदल दूरी पर है। सुबह करीब पांच बजे राहत कार्य के लिए धारचूला से रवाना की गई प्रशासन, राजस्व विभाग की टीम अब भी रास्ते में ही फंसी है। सेना व आइटीबीपी के जवान स्थानीय लोगों के साथ मलबे में खोजबीन अभियान चला रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों से मिल रही सूचना से तबाही और भी विकराल हो सकती है क्योंकि इस क्षेत्र में धार्मिक यात्रा के अलावा स्थानीय लोगों की इन दिनों आवाजाही बढ़ी हुई थी। ऐसे में इन लोगों के मालपा व घटियाबगड़ में रात्रि विश्राम की आशंका भी जताई जा रही है। जिसे लेकर लापता लोगों की संख्या में बढ़ोतरी की संभावना है।

मौसम ने रोकी सीएम की राह

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व वित्त मंत्री प्रकाश पंत हेलीकॉप्टर से दोपहर बाद पिथौरागढ़ पहुंचे। अधिकारियों से घटना की जानकारी लेने के बाद घटनास्थल के लिए रवाना हुए लेकिन उच्च हिमालय क्षेत्र में मौसम खराब होने से पायलट ने जौलजीवी से ही हेलीकॉप्टर लौटा दिया।  

याद आया 1998 का मंजर 

मालपा की तबाही ने 1998 के भयावह मंजर की याद ताजा कर दी। यह स्थान कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर तीसरे दिन की पैदल यात्रा में पड़ता है। 1998 से पहले यह मानसरोवर यात्रा का तीसरा पैदल पड़ाव होता था। 17 अगस्त 1998 की रात यहां बादल फटने से पहाड़ी ढह गई थी। जिसमें 60 कैलास मानसरोवर यात्रियों समेत 260 आइटीबीपी, पुलिस व यात्रा सेवकों की मौत हो गई थी। महीनों शवों की खोज का अभियान चला था। तभी से यहां कैलास यात्रियों को रुकने नहीं दिया जाता। अलबत्ता बाद के दिनों में फिर यहां बसासत होनी लगी। तीन-चार होटल बन गए। भारत चीन व्यापार में जाने वाले और उच्च हिमालयी गावों के लोग धारचूला आने जाने के दौरान रात्रि विश्राम भी यहीं करते हैं। 

सुरक्षित स्थानों पर रोके गए कैलास यात्री

मालपा में प्राकृतिक आपदा के बाद कैलास मानसरोवर व आदि कैलास यात्रा में गए दलों को सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया गया है। यात्रा संचालक कुमाऊं मंडल विकास निगम के जीएम त्रिलोक सिहं मर्तोलिया ने बताया कि कैलास मानसरोवर यात्रा के 16 वें दल को सिरखा पड़ाव, वापस लौट रहे 12 वें दल को धारचूला में, 13 वें 14, 15 वें दल को गूंजी व चीन में रोक दिया गया है। जबकि आदि कैलास के दल को बूंदी में रोका गया है।

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