जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़ : सीमांत में 32 घंटे बाद फिर तहसील डीडीहाट के हुनेरा, पमतोड़ी, खोली गांव और धारचूला के जुम्मा के नाग भारमैली में बादल फट गया। बादल फटने से अस्कोट-कर्णप्रयाग मार्ग थल से डीडीहाट के मध्य कई स्थानों पर बह गया है। गोशाला ध्वस्त होने से तीन पशु जिंदा दफन हो गए। दर्जनों मकान क्षतिग्रस्त हो गए। तीन पैदल पुलिया बह गई हैं। दो दर्जन परिवारों को विद्यालय भवनों में शिफ्ट कर दिया गया है।

डीडीहाट तहसील के हुनेरा-पमतोड़ी गांव में बादल फटने की घटना रात्रि डेढ़ बजे हुई। बादल फटने से दर्जन भर मकान क्षतिग्रस्त हो गए। तहसील क्षेत्र की तीन सड़के बंद हो गई हैं। दो दर्जन परिवारों का सुरक्षा की दृष्टि से सरकारी स्कूलों में शिफ्ट कर दिया गया है।

तहसील मुख्यालय पर अंबेडकर वार्ड में सावित्री देवी की गोशाला ध्वस्त हो गई, जिसमें दबकर एक गाय और दो बछड़ों की मौत हो गई। हरीश कन्याल और पूजा चुफाल के मकानों में मलबा भर गया। जीआइसी वार्ड में हरीश राम, गणेश राम, भीम सिंह, रमेश राम और धर्मराम के मकान भूस्खलन से खतरे की जद में आ गए हैं। इन परिवारों को जीआइसी में शिफ्ट कर दिया गया है। हाईडिल वार्ड में कमला देवी, धनीराम, खुशाल राम के परिवारों और नार्मल वार्ड से इंद्र सिंह, बालक सिंह के परिवारों को शिफ्ट कर दिया गया है। हुनेरा क्षेत्र में बादल फटने से कमला देवी का मकान ध्वस्त हो गया। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई। मोहन राम, रुद्रराम, दीपलाल, टीकालाल, के घरों में मलबा घुस गया। इन परिवारों को प्राइमरी पाठशाला तवाबगड़ में शिफ्ट किया गया है। चन्याल गांव में भूस्खलन से मोहन राम, देवकी देवी, पूरन राम, भीमराम, नंदीराम, गणेश राम, बसंत, पूरन सिंह, हीरा राम, किशन राम, जवाहर राम, तारा देवी और मंगल सिंह के मकानों को खतरा पैदा हो गया है। क्षेत्र में कई नाली उपजाऊ भूमि मलबे से पट गई। खोली गांव में भी बादल फटने से भारी भूस्खलन हुआ है, जिससे मकान खतरे में आ चुके हैं। डीडीहाट-थल, डीडीहाट-भातड़ और छनपट्टा सड़क जगह-जगह मलबा आने से बंद हो गई है। कानूनगो किशन भंडारी, राजस्व उपनिरीक्षक विजय कुमार साह ने प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर मौका मुआयना किया। कानूनगो ने बताया कि शिफ्ट किए गए परिवारों को पूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

तहसील धारचूला के नाग भरमौली में भी गुरुवार रात बादल फट गया। इस दौरान हुई मूसलधार बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। कई घंटों तक हुई बारिश से सैकड़ों नाली कृषि भूमि कुलागाड़ नदी में बह गई है। बारिश से गांव के सभी संपर्क मार्ग और तीन पैदल पुलिया बह गई है। राइंका जुम्मा की सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त हुई है। बादल फटने से जनहानि तो नहीं हुई परंतु बारिश के रंग को देखकर लोग सहमे हैं।

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