चम्पावत : कुमाऊं की उत्पत्ति का शहर और चंदों की राजधानी रही चम्पावत नैसर्गिक, धार्मिक और एतिहासिकता की त्रिवेणी है। खूबसूरती में यहा की वादिया स्वीटजरलैंड को मात देती हैं। धर्म और आस्था के द्वार उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठ मा पूर्णागिरि धाम से ही खुल जाते हैं। जैसे ही मैदान से पहाड़ का सफर शुरू होता हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगल, सर्पीली सड़कें, घाटियों के बीच बहती नदिया मंत्रमुग्ध कर देती हैं। श्यामलाताल झील का आर्कषण, चम्पावत का नजारा, एपटमाउंट, मंच, बापरु से हिमालय दर्शन मन को प्रफुल्लित कर देता है। कुमाऊं के आराध्य देव न्यायकारी गोलज्यू का दरबार असहाय, पीड़ित और सताये लोगों का सबसे बडा आसरा हैं। राजबुंगा, बाणासुर किला, ब्यानधूरा, दूनकोट, घटोतकच्छ, मानेश्वर, बालेश्वर के बिरखम यहा की एतिहासिकता की खुली किताब हैं। मायावती आश्रम जहा अद्वैतवाद की गंगोत्री है। वहीं सिखों का तीर्थस्थल रीठा साहिब नानक जी के चमत्कार का गवाह है। तल्लादेश के गुरु गोरखनाथ धाम में सतयुग से अनवरत जल रही धूनी संत परंपरा की लौ को दीप्तीमान कर रही हैं। देवीधूरा का मा बाराही दरबार आस्था, शक्ति और अदभुत परंपरा का द्योतक है। प्रस्तुत है दिनेश चंद्र पांडेय की रिपोर्ट---

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फोटो-- 21सीएमटीपी01

1-- रानी चंपा के नाम से चम्पावत

राजा सोम चंद की रानी चंपा के नाम पर नगर का नामकरण हुआ हैं। कत्यूरी शासक ब्रह्मदेव की सुई में सोनितपुर नाम से राजधानी थी। नेपाल में चंदों का शासन था। ब्रह्मदेव की एकमात्र पुत्री चंपा थी। जिसका विवाह उन्होंने राजकुमार सोमचंद के साथ किया और उसे चम्पावत क्षेत्र को दहेज के रूप में दिया। नगर का नाम चंपा के नाम पर रखने के बाद सोम चंद ने यहा राजबुंगा किले का निर्माण कर अपना शासन शुरू किया। सन 700 के आसपास की इस धटना के बाद सोमचंद ने विभिन्न प्रातों से आये लोगों को योग्यता के आधार पर दरबारी तैनात किया। चम्पावत क्षेत्र में आज भी उस समय कार्य के आधार पर किया गया जातीय वर्गीकरण कायम हैं।

कैसे पहुंचे-------

दिल्ली और बडे महानगरों से रोडवेज बस और सीधी टैक्सी सेवा मौजूद है।

रहने की सुविधा-----

सर्किट हाऊस, जिला पंचायत, वन विभाग के डाक बंगले हैं। दो दर्जन के करीब छोटे बडे होटल हैं। टीआरसी व मंदिरों में धर्मशालाएं हैं। यहा रहना खाना काफी किफायती है।

हल्द्वानी से टैक्सी किराया---

350 रुपये प्रति व्यक्ति

रोडवेज बस किराया---

280 रुपये प्रति व्यक्ति

केमू बस किराया---

बस सेवा नहीं है।

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फोटो-21सीएमटीपी02

2---आस्था का धाम पूर्णागिरि

टनकपुर की अन्नपूर्णा चोटी पर मा का धाम हैं। यहा मा सती का नाभि अंग गिरा था। देवी के इकावन शक्तिस्थलों में इसकी भी गणना होती है। यहा चैत्र नवरात्र में मेला लगता है। यह धाम 150 साल पहले गुजरात के काठियाबाड से आए श्री चंद तिवारी को स्वप्न में दिखा दिया, तब इसकी खोज हुई तो इस स्थान पर बहुत बडा नाभि के आकार का छिद्र बना था और अंतिम छोर का पता नहीं था। हा उस स्थान पर विशेष ज्योति के दर्शन होने पर तब से पूजा अर्चना शुरू हो गई। यहा दर्शन के बाद भक्त शारदा बूम में स्नान कर नेपाल के सिद्ध बाबा में शीश नवाते हैं।

कैसे पहुंचे-----

दिल्ली और बडे महानगरों से बस टैक्सी की टनकपुर तक सेवायें हैं। यहा से ठुलीगाड़ भैरव मंदिर तक टैक्सियों से पहुंच सकते हैं।

रहने की सुविधा----

टनकपुर में जिला पंचायत, लोनिवि, वन विभाग के डाक बंगले हैं। पचास के करीब छोटे बडे होटल हैं। पूर्णागिरि क्षेत्र में टीआरसी व धर्मशालाएं हैं। यहा रहना खाना काफी किफायती दाम पर उपलब्ध है।

हल्द्वानी से टैक्सी किराया---

180 रुपये प्रति व्यक्ति

रोडवेज बस किराया---

140 रुपये प्रति व्यक्ति

केमू बस किराया---

बस सेवा नहीं है।

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फोटो-21सीएमटीपी03

3------सुरम्य श्यामलाताल झील

टनकपुर से 25 किमी दूर स्वतंत्रता सेनानियों के गढ़ सूखीढाग में सुरम्य श्यामलाताल झील हैं। यहा रामकृष्ण मठ का आश्रम है। इस क्षेत्र को सेकंड शिमला भी कहते हैं। कुदरत ने इसे मुक्त हस्त से संवारा है। इसी क्रम में नगर के शीर्ष में राजबुंगा किला है। राजा सोमचंद ने सातवीं सदी में इसका निर्माण किया। इसके निकट नागनाथ मंदिर हैं। जिसे नगर का रक्षक कहा जाता है।

कैसे पहुंचे----

टनकपुर से टैक्सी मिल जाती हैं। सूखीढाग तक बस से आ सकते हैं।

रहने की सुविधा----

यहा कुमाऊॅ मंडल विकास निगम का डाक बंगला हैं। आश्रम में भी रहने की व्यवस्था हैं।

हल्द्वानी से टैक्सी किराया--

230 रुपये प्रति व्यक्ति

रोडवेज बस किराया--

190 रुपये प्रति व्यक्ति

केमू बस किराया--

बस सेवा नहीं है।

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फोटो-21 सीएमटीपी05

5------शिल्पकला की बेजोड़ कृति बालेश्वर मंदिर समूह

नगर में शिल्पकला का बेजोड़ नमूना बालेश्वर मंदिर समूह हैं। यहा मंदिरों में उत्कृष्ट कला के दर्शन होते हैं। शिवधाम में आधा दर्जन मंदिरों का समूह हैं। चार किमी दूर जल देवता के रूप में पूजित घटोतकच्छ का मंदिर देवदार बनी के बीच बना हैं। यहा कुमाऊॅ की उतपत्ति का द्योतक कांतेश्वर चोटी हैं। कहते हैं भगवान विष्णु ने यहा कूर्म अवतार लेकर तप किया और तभी इस क्षेत्र का नाम कुमूं पडा जिसे अब कुमाऊॅ कहा जाता हैं। नगर से छह किमी दूर मानेश्वर मंदिर हैं। कहते हैं अज्ञातवास के दौरान पाडवों ने इसकी स्थापना की।

कैसे पहुंचे-----

चम्पावत जिला मुख्यालय है। यहा के लिए दिल्ली देहरादून नैनीताल बरेली से सीधी बस सेवाएं हैं। अपने वाहनों से आया जा सकता हैं।

रहने की व्यवस्था-----

सर्किट हाउस के साथ ही जिला पंचायत, वन व सिंचाई विभाग के डाक बंगले हैं। पर्यटक आवास गृह और दो दर्जन से ज्यादा अच्छे होटल हैं।

हल्द्वानी से टैक्सी किराया---

350 रुपये प्रति व्यक्ति

रोडवेज बस किराया---

280 रुपये प्रति व्यक्ति

केमू बस किराया---

बस सेवा नहीं है।

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फोटो-21सीएमटीपी06

6------एतिहासिक है ब्यानधूरा

दूरस्थ व घने जंगलों के बीच ब्यानधूरा धाम हैं। यहा अर्जुन ने अपना गाडीव धनुष रखा था। तभी से उस स्थान को ऐड़ी देव के रूप में पूजा जाता है। यहा चढावे में धनुष बाण ही चढ़ते हैं। हर साल मकर संक्त्राति को यहा मेला लगता हैं। यहा कई जगह बिरखम शिलालेख बिखरे पड़े हैं।

कैसे पहुंचे-----

टनकपुर से सेनापानी होते हुए शक्तिमान ट्रकों से यात्रा होती हैं। दस किमी फिर पैदल चलना होता हैं। सूखीढाग से पैदल रास्ता 25 किमी हैं। ट्रैकिंग के लिहाज से यहा का रोमाच अलग हैं।

रहने की व्यवस्था----

यहा मंदिर की धर्मशाला है।

हल्द्वानी से टैक्सी किराया---

सेवाएं नहीं हैं।

रोडवेज बस किराया---

सेवाएं नहीं हैं।

केमू बस किराया---

सेवाएं नहीं हैं।

(पैदल और ट्रक से जाते हैं।)

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फोटो -21सीएमटीपी07

7-----गोरखनाथ में सतयुग से धूनी

चम्पावत से 40 किमी दूर तामली मार्ग में गुरु गोरखनाथ का धाम हैं। गोरखपुर के बाद देश में यह गोरखपंथियों का दूसरा बड़ा मठ हैं। कहते हैं सतयुग में गोरखनाथ बाबा ने यहा धूना रमाया था। तब से अनवरत यह प्र“वलित है। यहा मंच कस्बे से हिमालय की चोटिया का आकर्षण अलग है ।

कैसे पहुंचे-----

चम्पावत से मंच तक टैक्सिया चलती हैं। वहा से चार किमी का पैदल रास्ता हैं।

रहने की व्यवस्था-----

मंदिर में धर्मशाला हैं। मंच कस्बे में वन विभाग और खोकिया में लोनिवी का विश्राम गृह हैं।

हल्द्वानी से टैक्सी किराया---

425 रुपये प्रति व्यक्ति

रोडवेज बस किराया---

बस सेवा नहीं है।

केमू बस किराया---

बस सेवा नहीं है।

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फोटो-21सीएमटीपी08

8-------अद्वैत की गंगोत्री है मायावती

स्वामी विवेकानंद के शिष्य ब्रिटिश कै सेवियर ने 28 अक्टूबर 1900 को मायावती आश्रम की स्थापना की। स्वामी जी ने सेवियर की मौत के बाद 3से 17जनवरी 1901 तक यहां प्रवास किया। अद्वैतवाद का यह रामकृष्ण मिशन द्वारा संचालित अकेला आश्रम है। यहा धर्माथ चिकित्सालय हैं। प्रबुद्ध भारत पत्रिका का संपादन आज भी यहा से होता हैं। यह स्थान चम्पावत से 23 किमी दूर हैं।

कैसे पहुंचे-----

चम्पावत लोहाघाट से टैक्सिया से आसान सफर हैं।

रहने की व्यवस्था------

विशेष अतिथियों के रुकने की व्यवस्था आश्रम में है । वैसे यहा चम्पावत लोहाधाट में रुक कर घूमा जा सकता है। जहा तमाम होटल हैं।

हल्द्वानी से टैक्सी किराया---

400 रुपये प्रति व्यक्ति

रोडवेज बस किराया---

बस सेवा नहीं है।

केमू बस किराया---

बस सेवा नहीं है।

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फोटो--21सीएमटीपी09

9------खूबसूरत है एपटमाउंट

1816 में सिंगौली संधि के बाद जब अंग्रेजों के हाथ उत्तराखंड की हुकूमत आई, तो उन्होंने पहाड़ के ठंडे व खूबसूरत स्थलों पर आशियाने बनाये। चम्पावत के फूलगड़ी और एपटमाउंट में कई बंगले बने और पर्यटकों के धूमने के लिहाज से ये मनोरम हैं। यहा से हिमालय की पर्वत श्रखला मनभावन दिखती हैं। यहा मुक्ति कोठी के नाम से एक भुतवा महल भी चर्चित है।

कैसे पहुंचें---

लोहाधाट से पाच किमी की दूरी पर यह स्थान हैं। निजी और किराये की टैक्सी से जा सकते हैं। वैसे नेशनल हाइवे से जुड़ा होने के कारण यहा के लिए बस आदि चलती रहती हैं।

रहने की व्यवस्था-----

लोहाघाट या चम्पावत में रुक कर यहा का भ्रमण किया जा सकता हैं। जहा रहने खाने के अच्छे होटल हैं।

हल्द्वानी से टैक्सी किराया---

400 रुपये प्रति व्यक्ति

रोडवेज बस किराया---

330 रुपये प्रति व्यक्ति

केमू बस किराया---

बस सेवा नहीं है।

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फोटो21सीएमटीपी10

10------साहसिक है बाणासुर का किला

अल्मोड़ा मार्ग में लोहाघाट से 7 किमी दूर बिसंग में बाणासुर का किला चोटी पर हैं। यह किला बाणासुर द्वारा निर्मित बताया जाता हैं। खड़ी चढ़ाई के बाद यहा से पूरे क्षेत्र का नजारा अदभुत दिखता हैं। यहा का सफर साहसिक व रोमाच से भरपूर हैं। ट्रैकिंग के लिहाज से यह बेहतर जगह हैं।

कैसे पहुंचे----

लोहाघाट से लगातार बस व टैक्सिया चलती हैं।

रहने की व्यवस्था----

यहा का भ्रमण चम्पावत व लोहाघाट में स्टे करने के बाद आराम से कर सकते है।

हल्द्वानी से टैक्सी किराया---

410 रुपये प्रति व्यक्ति

रोडवेज बस किराया---

सीधी बस सेवा नहीं है।

केमू बस किराया---

280 रुपये प्रति व्यक्ति

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फोटो-21सीएमटीपी11

11------गुरु नानक के चमत्कार का साक्षी रीठा साहिब

लधिया रतिया नदी के संगम पर बना रीठा साहिब गुरुद्वारा नानक जी के चमत्कार का मूक दर्शक हैं। कहते हैं यहा जब नानक जी आये थे तो उनके शिष्य मरदाना को भूख लगी पास में रीठे का पेड़ था। जब गुरु जी ने कड़वा रीठा उसे दिया तो वह मीठा हो गया। बाद में अनुयायियों ने यहा गुरुद्वारा बनाया। हर साल वैशाखी पूर्णिमा पर यहा तीन दिनी जोड़ मेले का आयोजन होता हैं। जिसमें देश विदेश से हजारों यात्री आते हैं। वैसे सालभर यहा श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगा रहता है । यहा रीठे को प्रसाद के तौर पर दिया जाता हैं।

कैसे पहुंचे----

दिल्ली, हल्द्वानी, टनकपुर से सीधी बस सेवाएं हैं। टैक्सी और निजी वाहनों से पहुंच सकते हैं।

रहने की व्यवस्था -----

गुरुद्वारे में लंगर के साथ रहने के लिए कमरे हैं।

हल्द्वानी से टैक्सी किराया---

400 रुपये प्रति व्यक्ति

रोडवेज बस किराया---

सीधी बस सेवा नहीं है।

केमू बस किराया---

सीधी बस सेवा नहीं है।

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फोटो-21सीएमटीपी12

12------शक्ति आस्था का धाम बाराही देवीधूरा

देवीधूरा का बाराही धाम आस्था, शक्ति और अदभुत परंपरा का केंद्र हैं । यहा रक्षा बंधन के रोज पत्थरों का बग्वाल युद्ध अनोखी परंपरा हैं। हालाकि अब फल और फूलों से यह परंपरा निभाई जा रही हैं। बाराही का धाम स्वयं प्रकृति ने बनाया हैं। यहा आत्मिक शाति मिलती हैं। पूरे साल यहा भक्तों की आवाजाही रहती हैं।

कैसे पहुंचे---

चम्पावत हल्द्वानी से रोडवेज बस की सेवा के साथ ही टैक्सी से यहा आ सकते हैं। केमू सुविधा नहीं है।

रहने की व्यवस्था---

यहा धर्मशाला हैं। जिला पंचायत, लोनिवि, वन विभाग का डाक बंगला हैं। साथ ही एक दो होटल भी हैं। पार्किग की पूरी व्यवस्था है।

हल्द्वानी से टैक्सी किराया--

200 रुपये प्रति व्यक्ति

रोडवेज बस किराया--

150 रुपये प्रति व्यक्ति

केमू बस किराया--

140 रुपये प्रति व्यक्ति

Posted By: Jagran