यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 15, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
नोट बंद होने से नेपाली मजदूरों के सामने संकट
संवाद सूत्र, झूलाघाट: भारत में 500 व 1000 के नोट बंद होने का असर नेपाल में भी साफ दिख रहा है। पुराने

संवाद सूत्र, झूलाघाट: भारत में 500 व 1000 के नोट बंद होने का असर नेपाल में भी साफ दिख रहा है। पुराने नोट बंद होने से नेपाल के सुदूर पश्चिमी इलाके प्रभावित हुए हैं।
नेपाल के बाजारों में नेपाली से ज्यादा भारतीय मुद्रा चलन में रहती है। इसी मुद्रा से नेपाली व्यापारी भारतीय व्यापारियों से जरूरी सामान भी खरीदते हैं, मगर अब भारत में बड़े नोट बंद से हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं। एक ओर जहां उन्हें भारत से सामान लेने में दिक्कत आ रही है, वहीं उनके पास मौजूद भारतीय मुद्रा बैंकों में जमा नहीं हो रही है। नेपाल के सुदूर पश्चिमी कंचनपुर, डडैलधुरा, कैलाली, बाजुरा, डोटी, अछाम, बैतड़ी, दार्चूला व बजांग की 99 प्रतिशत जनता भारत में कुमाऊं और गढ़वाल में मेहनत मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है। साल भर मेहनत मजदूरी कर थोड़ी-बहुत रकम एकत्र करने वाले ये मजदूर अब करेंसी के फेर में फंस गए हैं। इन मजदूरों के लिए अब ये नोट कागज के टुकड़ों के समान रह गए हैं।
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नमक की अफवाह से महेंद्रनगर में नमक की किल्लत
झूलाघाट: नमक की कीमत बढ़ने की अफवाह के चलते नेपाल के महेंद्रनगर में नमक की किल्लत हो गई है। कंचनपुर निवासी रेडियो संपादक रमेश धामी ने बताया कि 20 रुपये प्रतिकिलो बिकने वाला नमक बीते दिनों यहां 200 रुपये प्रतिकिलो बिका। हालांकि, यह केवल अफवाह होने से नमक फिर से 20 रुपये प्रतिकिलो बिकने लगा, मगर अब लोग नमक को बोरियों में भर-भर कर घर ले जा रहे हैं। जिस कारण यहां नमक की किल्लत हो गई है।
