जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़ : तुष्टिकरण के लिए खोली गई तहसीलें जनता के लिए अधिक परेशानी का कारण बन चुकी हैं। बिना तहसीलदारों और उपजिलाधिकारियों के चल रही इन तहसीलों में कोई काम-काज नहीं हो रहा है। जनता के एक दिन में होने वाले कार्य अब एक सप्ताह में भी नहीं हो पा रहे हैं।

बीते वर्षो में सीमांत जिले में आधा दर्जन तहसीलें बढ़ गई। जिले में पूर्व में छह तहसीलें पिथौरागढ़, धारचूला, डीडीहाट, मुनस्यारी, बेरीनाग और गंगोलीहाट थीं। बीते एक दो वर्षो में तहसीलों की संख्या ठीक दो गुना हो चुकी है। बीते सप्ताह तेजम तहसील की घोषणा होते ही जिले में तहसीलों की संख्या 12 हो चुकी है। नई तहसीलों में गणाईगंगोली, बंगापानी, थल, देवलथल, कनालीछीना और तेजम शामिल हैं। तहसीलें तो बन गई परंतु तहसीलों में कामकाज तहसीलदार और एसडीएम की तैनाती नहीं होने से अटके हैं। नई बनी तहसीलों में नायब तहसीलदार को तहसीलदार का कार्यभार सौंप कर कार्य हो रहा है। उसमें भी एक नायब तहसीलदार के जिम्मे दो से तीन तहसीलें हैं।

वर्तमान में जिले में मात्र तीन उपजिलाधिकारी तैनात हैं। जिसमें वैभव गुप्ता बेरीनाग, गंगोलीहाट, गणाईगंगोली और थल का कार्य देख रहे हैं। कौस्तुभ मिश्र के पास मुनस्यारी, धारचूला, डीडीहाट, बंगापानी, देवलथल की जिम्मेदारी है। एसके पांडेय सदर उपजिलाधिकारी बनाए गए हैं। सदर एसडीएम होने से उनके पास कार्यो की भरमार है। इसी तरह मात्र पिथौरागढ़ तहसील में पूर्ण तहसीलदार तैनात हैं। अन्य स्थानों पर नायब तहसीलदार तहसील के मुखिया बने हैं।

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विस चुनावों के लिए आरओ का टोटा

पिथौरागढ़: 2017 के विधान सभा चुनाव करीब हैं। चुनाव को देखते हुए निर्वाचन आयोग तैयारी कराने लगा है। यहां तो तहसीलों में आरओ के पद रिक्त चल रहे हैं। जिले में चार विस क्षेत्र पिथौरागढ़, डीडीहाट, धारचूला और गंगोलीहाट हैं। पिथौरागढ़ छोड़कर अन्य तहसीलों में स्थाई एसडीएम नहीं हैं। आरओ नहीं होने से चुनावों को देखते सवाल उठने लगे हैं।

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डीडीहाट के हुए कई टुकड़े

पिथौरागढ़: जिले में सबसे बड़ी रही डीडीहाट तहसील के कई टुकड़े हो गए हैं। करीब डेढ़ दशक पूर्व डीडीहाट को काट कर बेरीनाग तहसील बनाई गई। इधर अब डीडीहाट के क्षेत्र को काट कर देवलथल, कनालीछीना, थल तहसीलें बन गई हैं। डीडीहाट का गोरी नदी से लगा क्षेत्र बंगापानी में शामिल किया है। अतीत में सबसे बड़ी तहसील अब सबसे छोटी तहसील बन कर रह गई है।

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सरकार तहसीलें खोल रही है यह तो ठीक है। जब तक एसडीएम और तहसीलदारों की नियुक्ति नहीं की जाती हैं तब तक तहसील खुलने का जनता को कोई फायदा नहीं है। तहसील खोलने के साथ ही तहसीलदार और एसडीएम की नियुक्ति आवश्यक है।

विशन सिंह चुफाल, भाजपा विधायक

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वर्तमान में एसडीएम और तहसीलदारों की कमी है। शासन जल्दी एसडीएम और तहसीलदारों की नियुक्ति करने जा रहा है। जिले में भी जल्दी उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों की नियुक्ति होने वाली है। शासन से इस तरह के निर्देश जिला प्रशासन को मिल चुके हैं।

अनुराग आर्य, ओसी कलक्ट्रेट

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