कोटद्वार, जेएनएन। स्पेन से लौटे युवक के कोराना संक्रमित होने का पता चलने के बाद कोटद्वार बेस अस्पताल के कोरोना वार्ड के नोडल अधिकारी समेत तीन डाक्टर, चार नर्स व दो सफाई कर्मियों को होम क्वारंटाइन कर दिया गया। एक वार्ड ब्वाय व संक्रमित युवक के दोस्त को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। इस बीच, अस्पताल में भर्ती और ओपीडी में जिन भी मरीजों को इन डॉक्टरों और स्टाफ ने देखा था, सूची तैयार की जा रही है।

पौड़ी जिले के दुगड्डा ब्लाक निवासी एक युवक को 19 मार्च को बेस अस्पताल कोटद्वार में आइसोलशन वार्ड में भर्ती कराया गया। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग उसे ट्रेस कर 18 मार्च को चेकअप के लिए दुगड्डा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया था। यहां से उसे होम क्वारंटाइन की सलाह देकर घर भेज दिया गया। 

अगले दिन तबीयत बिगड़ने पर पड़ोसियों के दबाव पर वह चेकअप के लिए बेस अस्पताल पहुंचा। बुधवार को उसकी कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आने का पता चला। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. मनोज बहुखंडी ने बताया कि बेस अस्पताल में युवक का इलाज कर रहे डाक्टर के संपर्क में कोरोना वार्ड के नोडल अधिकारी भी थे। 

इसके मद्देनजर दोनों डॉक्टरों, चार नर्स और दो सफाई कर्मियों के साथ ही दुगड्डा में प्राथमिक उपचार देने वाले डॉक्टर को होम क्वारंटाइन कर दिया गया है। बीमार युवक को मोटरसाइकिल पर घर से पीएचसी तक लाने वाले वार्ड ब्वाय और एक अन्य युवक को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। क्वारंटाइन किए गए डाक्टरों की ओपीडी में चेकअप के लिए आने वाले और वार्डो में भर्ती उनके मरीजों को चिह्न्ति किया जा रहा है।

बुद्धिजीवियों को आशंका, कैसे सफल होगा लॉकडाउन का उद्देश्य

सरकार के शुक्रवार से सुबह सात बजे से दोपहर एक बजे तक आवश्यक वस्तुओं के लिए बाजार खुले रखने और दुपहिया को छूट देने फैसले से शहर का बुद्धिजीवी तबका आशंका जता रहा हैं कि इससे लॉकडाउन का उद्देश्य ही पूरा नहीं हो पाएगा। 

असामाजिक तत्व और तमाशबीन इस ढील का दुरुपयोग करेंगे, इस आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता है। प्रशासन ऐसे तत्वों को रोक पाएं, इसमें शक की पूरी गुंजाइश बनी हुई है। बुद्धिजीवियों को आशंका है कि इस ढील के चलते कोई भी व्यक्ति आधा किलो चावल या एक ब्रेड के लिए सारा शहर छान लेंगे। 

उनका तर्क है कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देशवासियों से हाथ जोड़कर अपील की थी कि कोराना महामारी को परास्त करने के लिए 21 दिनों तक किसी भी सूरत में सड़कों पर न निकलें। क्योंकि, कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए ऐसा करना नितांत जरूरी है। दूसरी तरफ, सरकार लोगों को बाजारों निकलने का एक प्रकार से ऑफर दे रही है।

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बुद्धिजीवी सवाल कर रहे हैं कि प्रदेश सरकार की ऐसी कौन-सी मजबूरी है कि वह 31 मार्च तक लॉकडाउन के अपने ही फैसले पर भी कायम नहीं रह पाई। जबकि, उत्तराखंड के हालात इसकी इजाजत नहीं दे रहे और इसका एकमात्र हल 21 दिन का लॉकडाउन ही है। जिसका पूरा देश समर्थन कर रहा है।

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Posted By: Bhanu Prakash Sharma

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