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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 02, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

धारी झूला पुल का निर्माणाधीन सपोर्टिंग पिलर अलकनंदा में गिरा

By sunil negiEdited By:
Published: Sat, 02 Jul 2016 10:14 AM (IST)Updated: Sat, 02 Jul 2016 10:17 AM (IST)

पौड़ी जनपद के श्रीनगर गढ़वाल में अलकनंदा में धारी गांव जाने के लिए बने झूला पुल का निर्माणाधीन सपोर्टिंग पिलर (एंकर) अलकनंदा नदी में गिर गया।

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श्रीनगर गढ़वाल, [जेएनएन]: श्रीनगर से लगभग 14 किमी दूर कलियासौड़ में धारी देवी मंदिर के समीप अलकनंदा नदी में धारी गांव जाने के लिए बने झूला पुल का निर्माणाधीन सपोर्टिंग पिलर (एंकर) बीती शाम अलकनंदा नदी में गिर गया।
झूला पुल को मजबूती देने के लिए अलकनंदा के दोनों छोर पर बनाए जा रहे इन सपोर्टिंग पिलर से लोहे के मोटे-मोटे तारों को झूला पुल से बांधा जाना है जिसमें बीती शाम को धारी देवी मंदिर की ओर का निर्माणाधीन सपोर्टिंग पिलर नदी में जा गिरा। धारी देवी मंदिर पुजारी न्यास के प्रबन्धक पुजारी लक्ष्मी प्रसाद पांडे ने बताया कि शुक्रवार शाम लगभग साढ़े चार बजे यह सपोर्टिंग पिलर जोर की आवाज के साथ नदी में जा गिरा। लगभग 20 फुट ऊंचा और आठ फुट चौड़ा यह निर्माणाधीन पिलर जब नदी में गिरा तो बड़ी तेज आवाज भी हुई।
धारी देवी के नए मंदिर का निर्माण कार्य रोका

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धारी देवी मंदिर पुजारी न्यास के तत्वावधान में मंदिर के पुजारियों ने धारी देवी के नए मंदिर का निर्माण कार्य 15 दिन से रोका हुआ है। आरोप है कि श्रीनगर जलविद्युत परियोजना की निर्माणदायी कंपनी निर्माण गुणवत्तापरक नहीं करा रही है और मंदिर के स्वरूप को भी छोटा किया जा रहा है। पूर्व में पुजारी न्यास के साथ मंदिर निर्माण को लेकर जिस स्वरूप पर सहमति बनी थी उसके अनुसार कार्य नहीं हो रहा है।

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धारी देवी मंदिर पुजारी न्यास के अध्यक्ष विश्वेश्वर प्रसाद पांडे, सचिव सच्चिदानंद पांडे, प्रबन्धक लक्ष्मी प्रसाद पांडे की ओर से इस मुद्दे पर एक पत्र भी प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजकर तत्काल हस्तक्षेप कर धारी देवी के नए मंदिर का निर्माण कार्य पूर्व की सहमति के आधार पर ही कराने की मांग की गयी है। निर्माणदायी कंपनी एएचपीसी के साइट सुपरवाइजर हरीश कुमार ने बताया कि यह सपोर्टिंग पिलर अभी निर्माणाधीन ही था। शुक्रवार अपराह्न में अलकनंदा नदी के अचानक बढ़े पानी के साथ आए बड़े-बड़े बोल्डरों और बड़े-बड़े पेड़ों के कारण निर्माणाधीन सपोर्टिंग पिलर क्षतिग्रस्त हुआ।

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