पर्यटन नगरी खिर्सू के आसमान में दिखा दुर्लभ खगोलीय नजारा, आने वाले दिनों में उल्कापात के आसार
खिर्सू, पौड़ी गढ़वाल में सोमवार सुबह एक दुर्लभ धूमकेतु को खगोलप्रेमी प्रीतम नेगी ने कैमरे में कैद किया। यह खगोलीय ...और पढ़ें

पौड़ी गढ़वाल जिले के खिर्सू से आसमान में इस तरह हुए आकाश गंगा के दीदार l प्रीतम नेगी
HighLights
खिर्सू में दुर्लभ धूमकेतु की यात्रा कैमरे में कैद।
खगोलप्रेमी प्रीतम नेगी ने किया अद्भुत नजारे का दीदार।
धूमकेतु सौर मंडल के प्राचीन रहस्यों का संदेशवाहक।
संवाद सूत्र, जागरण, खिर्सू (पौड़ी)। पर्यटन नगरी खिर्सू के आसमान में सोमवार सुबह एक अत्यंत दुर्लभ खगोलीय घटना घटित हुई। खिर्सू की पहाड़ियों से धूमकेतु की दुर्लभ यात्रा कैमरे में कैद हुई, जो खगोल प्रेमियों व खगोल विज्ञानियों के लिए कौतुहल बनी रहा। धूमकेतु की यह यात्रा खगोलप्रेमी एवं वरिष्ठ छायाकार प्रीतम नेगी के कैमरे में कैद हुई है।
पौड़ी जिले का खिर्सू कस्बा पर्यटन के साथ-साथ खगोल विज्ञानियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। यहां पहाड़ों की शुद्ध हवा और साफ आसमान खगोलीय घटनाओं का दीदार करने में अहम योगदान देता है। खगोल प्रेमियों व खगोल विज्ञानियों को अप्रैल का बेसब्री से इंतजार था, क्योंकि इस माह विशेष रूप से धूमकेतु की दुर्लभ यात्रा का संयोग बन रहा था।
खगोल प्रेमी व वरिष्ठ छायाकार प्रीतम नेगी ने बताया कि सोमवार सुबह 4:40 बजे खगोल प्रेमी एक दुर्लभ खगोलीय घटना के इंतजार में आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे थे। उनकी यह प्रतीक्षा तब कौतुहल में बदल गई, जब खिर्सू की पहाड़ियों से दूर आसमान में एक अत्यंत दुर्लभ खगोलीय घटना घटित होते दिखी।
उन्होंने बताया कि बीते 19 अप्रैल यह धूमकेतु सूर्य के सबसे ज्यादा नजदीक आया था। 20 अप्रैल को तड़के इस यात्रा को कैमरे में कैद किया गया। धूमकेतु का व्यास करीब तीन किमी होने का अनुमान है। जबकि, इसकी पूंछ लाखों किमी लंबी हो सकती है, जो सूर्य से दूरी के चलते धुंधली होती चली जाती है। बताया कि 20 अप्रैल की सुबह आकाश गंगा के दीदार भी हुए। उसे भी कैमरे में कैद किया गया है। खगोल प्रेमी नेगी ने बताया कि आने वाले दिनों में उल्कापात होने के पूर्ण आसार हैं।
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अरबों मील दूर से आया एक प्राचीन संदेशवाहक
खगोलीय विज्ञान की दृष्टि से धूमकेतु कोई साधारण तारा नहीं है। यह सौर मंडल के सबसे बाहरी घेरे से आया है, जिसे "ऊर्ट क्लाउड" कहा जाता है। यह क्षेत्र सूर्य से इतनी दूर है कि वहां पानी और गैसें पत्थर की तरह सख्त बर्फ में जमी रहती हैं।
विज्ञानियों का मानना है कि धूमकेतु सौर मंडल के निर्माण के समय के "अवशेष" हैं, जो अपने भीतर अरबों साल पुराने रहस्य छिपाए हुए हैं।
