जागरण संवाददाता, श्रीनगर गढ़वाल: एकेडमिक और शोध गतिविधियों में गुणात्मक सुधार लाने को एमएचआरडी, यूजीसी और केंद्रीय गढ़वाल विवि के बीच हुए एमओयू का हर तीन माह में रिव्यू किया जाएगा।

दिल्ली से लौटने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एकेडमिक और शोध गतिविधियों में गुणात्मक सुधार लाने, निर्धारित मदों के अनुसार ही बजट का सदुपयोग करने आदि मुद्दों को लेकर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय और यूजीसी के साथ गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय 16 अप्रैल को एमओयू हुआ है। इसका हर तीन महीने में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय समीक्षा भी करेगा। कहा कि इस समीक्षा में एमएचआरडी और यूजीसी की ओर से यह सुनिश्चित भी किया जाएगा कि विश्वविद्यालय में उल्लिखित शर्तों का पालन किया है अथवा नहीं।

कुलसचिव डॉ. एके झा ने कहा कि विश्वविद्यालय में कॉरपस फंड के लिए दो करोड़ रुपए और एल्युमिनाइज फंड मद में पांच लाख रुपये रखा है। स्थायी कुलपति की नियुक्ति होते ही विश्वविद्यालय में शिक्षकों के रिक्त पदों के साथ ही वित्त अधिकारी की भी नियुक्ति होगी। डॉ. झा ने कहा कि एमएचआरडी और यूजीसी के साथ जो एमओयू हुआ है उसके अनुसार विश्वविद्यालय को कार्य भी करना है। यदि परफारमेंस अच्छी नहीं रही तो विश्वविद्यालय को वेतन के लिए भी बजट मिलना मुश्किल हो जाएगा। विश्वविद्यालय को अपने खर्चों में भी कमी करनी है। गेस्ट फैकल्टी की जगह रिसर्च स्कॉलरों से भी शिक्षण कार्य करवाना है। विश्वविद्यालय के पास बजट की कमी है। यूजीसी से यदि बजट समय से नहीं मिला तो विश्वविद्यालय कर्मचारियों का अप्रैल माह का वेतन भी समय से देने में दिक्कत आएगी।

Posted By: Jagran

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