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अजीत डोभाल और सीडीएस जनरल सुब्रमणि के लैंसडौन दौरे ने लिखी इबारत, चाय संग खाया अरसा.. बोले- 'वाह, गजब का है स्वाद'

Published: Sun, 20 Sep 2026 11:10 AM (IST)

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने पहली बार एक साथ लैंसडौन स्थित गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर का दौरा किया।

लैंसडौन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि गढ़वाल राइफल्स की ट्रेनिंग के निरीक्षण के दौरान हथियारों की जानकारी लेते हुए : साभार सेना

लैंसडौन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि गढ़वाल राइफल्स की ट्रेनिंग के निरीक्षण के दौरान हथियारों की जानकारी लेते हुए : साभार सेना

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संक्षेप में पढ़ें

अनुज खंडेलवाल , लैंसडौन। गढ़वाल राइफल्स के 139 वर्ष के गौरवशाली इतिहास में शनिवार का दिन नई इबारत लिख गया। देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि पहली बार एक साथ लैंसडौन पहुंचे।

दोनों अधिकारियों ने नायक भवानी दत्त जोशी परेड ग्राउंड में रेजिमेंट की सैन्य परंपराओं व गौरवपूर्ण इतिहास को जाना और गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर में प्रशिक्षण व्यवस्था, प्रशासनिक ढांचे, कल्याणकारी गतिविधियों व सैनिकों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं का जायजा लिया। यह दौरा रेजिमेंट की विरासत व देश की वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था के शीर्ष नेतृत्व के ऐतिहासिक संगम का साक्षी बना।

शनिवार दोपहर हेलीकॉप्टर से लैंसडौन पहुंचे एनएसए अजीत डोभाल व सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि का नायक भवानी दत्त जोशी परेड ग्राउंड में गढ़वाल राइफल्स व गढ़वाल स्काउट के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल दिनेश सिंह राणा और सेंटर कमांडेंट ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने स्वागत किया। दोनों अधिकारियों ने रेजिमेंटल सेंटर की विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

प्रशिक्षण की गुणवत्ता, सैनिकों के कल्याण व रेजिमेंट की परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। दौरे के दौरान गढ़वाल राइफल्स की सैन्य विरासत के साथ बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप तैयारियों पर भी चर्चा हुई। इस दौरान रेजिमेंट की गौरवशाली सैन्य परंपराओं, अनुशासन व सैनिक कल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया। दौरे में गढ़वाल राइफल्स की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक सैन्य आवश्यकताओं के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने का पक्ष प्रमुखता से सामने आया।

शौर्य स्थल में रोपे पौधे

एनएसए अजीत डोभाल व सीडीएस जनरल एनएस राजा ने गढ़वाल राइफल्स के शौर्य स्थल पहुंच कर पौधरोपण किया। यह पौधरोपण उन वीर बलिदानियों की स्मृति व उनके अदम्य शैर्य को समर्पित रहा, जिन्होने राष्ट्र की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। इस दौरान उन्होने शौर्य स्थल का निरीक्षण भी किया। यह शौर्य स्थल गढ़वाल राइफल्स के शताब्दी द्वार व नायक भवानी दत्त जोशी परेड ग्राउंड के समीप स्थापित है।

शौर्य स्थल में महावीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल कमान सिंह पठानिया, तीसरी गढ़वाल राइफल्स, महावीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल बीएम भट्टाचार्य, चौथी गढ़वाल राइफल्स, महावीर चक्र विजेता कैप्टन सीएन सिंह, दूसरी गढ़वाल राइफल्स, महावीर चक्र विजेता राइफलमैन जसवंत सिंह रावत, चौथी गढ़वाल राइफल्स, अशोक चक्र विजेता नायक भवानी दत्त जोशी, नौवीं गढ़वाल राइफल्स, विक्टोरिया क्रास विजेता लेफ्टिनेंट विलियम डेविड केनी, 4/39 गढ़वाल राइफल्स, विक्टोरिया क्रास विजेता राइफलमैन गबर सिंह नेगी, 2/39 गढ़वाल राइफल्स और विक्टोरिया क्रास विजेता नायक दरबान सिंह नेगी, 1/39 गढ़वाल राइफल्स की प्रतिमाएं व वीरगाथा शौर्य स्थल को जीवंत करती है।

चाय के साथ अरसे का स्वाद चखा

दोनो शीर्ष अधिकारियों ने सेना के ट्रिप इस लाइफ आल वुमन कैफे में प्रकृति के मनमोहक नजारों के बीच चाय के साथ अरसे का स्वाद चखा। बता दें कि सेना की ओर से दीदी-भुल्ली सशक्तिकरण की पहल है। महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए इस कैफे का संचालन हाल ही में किया गया है।

इस कैफे की खास बात यह है कि इसमें काम करने वाली सभी कर्मी महिलाएं है। पहाड़ी व्यंजनों को इस कैफे में विशेष रूप से परोसा जाता है। हाल ही में इस कैफे ने पूरे क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। दोनों शीर्ष अधिकारियों के स्वागत के लिए रिखणीखाल क्षेत्र की महिलाएं गढ़वाली परिधान में मौजूद रही।

दुर्गा मंदिर में शीश नवाए

निरीक्षण के दौरान दोनों शीर्ष अधिकारी सेना के दुर्गा मंदिर पहुंचे। मंदिर में दोनों शीर्ष अधिकारियों ने शीश नवाकर पूजा-अर्चना कर राष्ट्र की खुशहाली की कामना की। बता दे की गढ़वाल राइफल्स का यह दुर्गा मंदिर राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। मंदिर की शैली कर्नाटक, परंपरा गढ़वाली है। मंदिर को उत्तर-दक्षिण की समंवित संस्कृति के अनुरूप तैयार किया गया है।

मंदिर को चार भागों में बांटा गया है। पहले भाग में मुखमंडल में प्रवेश द्वार है। मध्य में मांग राजराजेश्वरी व उनके दोनों और श्री गणेश व कार्तिकेय की मूर्तियां है। दूसरे भाग में प्राचीन मंदिर के ढांचे की की कलाकृतियों से सजाकर नवीन रूप दिया गया है। तीसरे भाग में प्रार्थना प्रकोष्ठ है, जिसकी दीवारें नौ स्तंभों में टिकी हुई है। चौथा और अंतिम भाग प्रधान मंदिर है।

वीर सिंह लाइन में ट्रेनिंग व्यवस्थाओं का लिया जायजा

शीर्ष अधिकारियों ने गढ़वाल राइफल्स की वीर सिंह लाइन पहुंच कर सेना की ओर से अग्निवीरों को दी जाने वाली ट्रेनिंग का जायजा लिया। इस दौरान सेंटर के प्रशिक्षण ढांचे का भी उन्होने अवलोकन किया। उन्होने सेना की ओर से सीडब्लूटीएस रूम में सेना का प्रशिक्षण देखा। साथ ही ड्रोन फ्लाई के साथ आर्मी मार्शल आर्ट का भी प्रदर्शन देखा।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को युद्धाभ्यास के दौरान दी जाने वाली ट्रेनिंग के विभिन्न चरणों की विस्तार से जानकारी दी गई।

सारथी बने ब्रिगेडियर नेगी

एनएसए अजीत डोभाल व सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के लैंसडौन दौरे में गढ़वाल राइफल्स के ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी अलग भूमिका में नजर आए। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान ब्रिगेडियर नेगी खुद सारथी बने और वाहन की कमान संभालते हुए उन्हें विभिन्न सैन्य स्थलों तक लेकर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान वाहन में कर्नल आफ द रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल दिनेश सिंह राणा भी ब्रिगेडियर नेगी के बगल में आगे की सीट में मौजूद थे।