जागरण संवाददाता, पौड़ी: पृथक उत्तराखंड राज्य बना, तो पहाड़ की झोली में आया ग्राम्य विकास का निदेशालय। और इसे गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी में स्थापित कर दिया गया। इस बीच कई सरकारें आई-गई लेकिन आज तक निदेशालय को अपने भवन के लिए भूमि तक नसीब नहीं हुई। ऐसे में आज भी निदेशालय खादी ग्रामोद्योग के गिनती के कमरों से संचालित हो रहा है। इस सब के बीच निदेशालय को कब अपना आशियाना मिलेगा, इसका माकूल जबाव किसी के पास नहीं है।

पौड़ी में ग्राम्य विकास का निदेशालय स्थापित हुआ तो उम्मीद भी यही थी कि पहाड़ी क्षेत्र में निदेशालय के स्थापित होने से विकास को नया आयाम मिलेगा। स्थापना के दौरान निदेशालय का अपना भवन नहीं था, तब व्यवस्था के लिए इसे खादी ग्रामोद्योग के कमरों में संचालित करने की व्यवस्था की गई। और यहीं से ग्राम्य विकास से जुड़े कार्य भी संचालित होने लगे। बताते हैं कि इस बीच निदेशालय के निर्माण के लिए जमीन चयनित कर शासन को स्वीकृति के लिए भी भेजा गया। वक्त गुजरता गया लेकिन भूमि स्वीकृति की उम्मीदें सरकारी फाइलों में दबकर रह गई। आज आलम यह कि राज्य के ग्राम्य विकास से जुड़े विकास कार्यों को संचालित करने की जिम्मेदारी निदेशालय के ऊपर तो है लेकिन उसे खुद आशियाने की दरकार है।

ग्राम्य विकास निदेशालय के भवन का मामला शासन स्तर का है। उम्मीद है कि जल्दी ही शासन स्तर से कुछ निर्णय होगा।

डॉ. जीएस खाती, उपायुक्त, ग्राम्य विकास निदेशालय, पौड़ी गढ़वाल।

Posted By: Jagran

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