जागरण संवाददाता, श्रीनगर गढ़वाल: प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि देश दुनिया के पर्यावरण के संरक्षण और संव‌र्द्धन को लेकर प्राकृतिक संसाधनों के बेहिसाब और अत्यधिक दोहन को रोकना जरूरी है।

कार्यक्रम के समापन समारोह की मुख्य अतिथि और गढ़वाल केंद्रीय विवि की अंग्रेजी विभाग की प्रो. सुरेखा डंगवाल, गढ़वाल विवि एजुकेशन विभाग के अध्यक्ष प्रो. पीके जोशी, कार्यशाला आयोजक सचिव प्रो. रमा मैखुरी ने प्रशिक्षण कार्यशाला की रिपोर्ट पुस्तक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि विकसित देश पर्यावरण को अत्यधिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है और प्राकृतिक संसाधनों से वंचित देशों के नागरिकों पर यह विकसित देश दोषारोपण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में पर्यावरण को लेकर हम सबको आत्म चितन करने की भी जरूरत है। प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में सचेत होना जरूरी है।

प्रशिक्षण कार्यशाला के संयोजक और विवि एजुकेशन विभाग के अध्यक्ष प्रो. पीके जोशी ने कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता शिक्षा के माध्यम से ही संभव है। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक इसके लिए पाठ्यक्रमों को विकसित करने की भी जरूरी है। जिसमें शिक्षकों की भूमिका प्रभावी है। प्रो. रमा मैखुरी ने कहा कि उत्तराखंड के पास पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन हैं,लेकिन उनका अत्यधिक दोहन असमानता पैदा कर रहा है। प्रो. सुनीता गोदियाल ने कहा कि पृथ्वी की महत्ता उसके संसाधनों से है। प्रो. आरसी रमोला, प्रो. अनिल नौटियाल, प्रो. गीता खंडूड़ी, प्रो. किरन डंगवाल, डॉ. रमेश राणा भी इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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