कोटद्वार, [जेएनएन]: आप 'वर्ड वाचिंग' का शौक रखते हैं तो इन दिनों लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार, कोटड़ी व दुगड्डा रेंज से बेहतर कोई और जगह नहीं। सर्द मौसम की आहट के साथ ही प्रभाग में अप्रवासी पक्षियों ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। 

अरुणाचल प्रदेश के बारटेल्ड ट्री कीपर हो या पाकिस्तान का ब्राउन फिश आउल, इंडोनेशिया की बार विंग्ड फ्लाई कैचर स्राइक हो, लैंसडौन वन प्रभाग के जंगल इन दिनों अप्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गूंजने लगा है। माना जा रहा है कि हिमालय के ऊपरी हिस्सों में बढ़ रही ठंड के चलते विभिन्न प्रजाति के पक्षियों ने लैंसडौन वन प्रभाग को अपना अस्थायी प्रवास बनाना शुरू कर दिया है। प्रभाग के जंगलों में अलग-अलग रंग-रूप के परिंदों के दीदार हो रहे हैं।

प्रभाग के जंगलों में रेड बिल्ड लियोथ्रेक्स, ब्लैक स्ट्रोक, ग्रे हेडेड केनरी फ्लाई कैचर, ब्राउन हैडेड बारबेट, स्पॉटेड फ्रॉकटेल जैसे कई अन्य प्रजातियों के पक्षी प्रभाग में नजर आने लगे हैं। इनके अलावा ग्रे हार्नबिल्स, मलार्ड, नार्दन शॉवलर, पाइड किंगफिशर, क्रिस्टेड किंगफिशर, इंडियन स्कोप्स ऑउल, क्रिमिशन सन वर्ड, नटहैच सहित कई अन्य पक्षियों की प्रजातियां आसानी से देखी जा रही हैं।

 पक्षी जो जल्द ही यहां आएंगे 

स्नोई ब्राउड फ्लाई कैचर, चेस्टनट हेडेड तिसिया, ग्रे वेलेड तिसिया, ग्रीन टेल सन वर्ड, ब्राउन डिपर, स्लेटी ब्लू फ्लाई कैचर, रुफस जार्जेट फ्लाई कैचर, पलाश ईगल, फिश ईगल, लांग बिल्ड थ्रस, रुबी थ्रॉट, ब्लैक स्ट्रोक, मरगेंजर शामिल हैं 

 पक्षी प्रेमियों के लिए 'स्वर्ग'

लैंसडौन वन प्रभाग इन दिनों पक्षी प्रेमियों के लिए किसी 'स्वर्ग' से कम नहीं। पक्षी जानकार राजीव बिष्ट कहते हैं कि अन्य स्थानों पर जहां बर्डिंग मौसम पर निर्भर है, लैंसडौन वन प्रभाग के जंगलों में वर्ष भर बर्डिंग की जा सकती है। दक्षिण भारत से पहुंचे पक्षी प्रेमी सुब्रामनियम वेंकेटरमन, दिल्ली के श्रवणदीप, नासिर, रिचर्ड, किंटू धवन, सावित्री सिंह, कोलकाता के सोनक लहरी, सलिल दत्ता, चिन्मय बनर्जी, मुंबई से दीपेन गोविंद शाह, सचिन मन सहित कई अन्य पक्षी प्रेमी भी लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार, कोटड़ी व दुगड्डा रेंज में पक्षियों के दीदार कर चुके हैं। इसके अलावा विदेशों में भी बर्ड वाचिंग के मामले में प्रभाग का डंका बज रहा है। 

 कैसे पहुंचे

गढ़वाल के प्रवेश द्वार 'कोटद्वार' पहुंचने के लिए दिल्ली से 205 किमी की दूरी तय कर रेल अथवा बस/कार से कोटद्वार पहुंचा जा सकता था। इसके अलावा कोटद्वार से नजदीकी हवाई अड्डा जौलीग्रांट 121 किमी दूर है। 

 

लैंसडौन वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी मयंक शेखर झा का कहना है कि प्रभाग में इन दिनों अप्रवासी पक्षियों की बहार है। हिमालयी के ऊपरी हिस्सों में बर्फबारी के कारण पक्षी नीचे की ओर आए हैं। फरवरी माह के अंत तक सभी अप्रवासी पक्षी प्रभाग में ही नजर आएंगे।

 

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Posted By: Sunil Negi

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