संवाद सहयोगी, पौड़ी: स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी सुविधाओं का अभाव झेल रहे पहाड़ी जनपदों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। सरकार ने पहाड़ी जनपदों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत तैनात चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम को कम किए का निर्णय लिया है। सीएमओ डॉ. बीएस जंगपांगी ने आदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की एक टीम जनपद में दो विकासखंडों का कार्य देखेगी।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पूरे राज्य में 148 सचल चिकित्सा दलों का गठन किया गया था, जिसमें प्रत्येक विकासखंड में एक या दो टीमें आवंटित की गई थी। इन टीमों का कार्य वर्ष में एक बार स्कूल व वर्ष में दो बार आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करना था। अब सरकार ने इस कार्यक्रम के तहत पहाड़ी जनपदों में तैनात चिकित्सकों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की टीम को कम किए जाने का निर्णय लिया है। इस आदेश से पौड़ी जनपद में पांच टीम कम हो जाएंगी। इससे चिकित्सक, फार्मासिस्ट सहित अन्य कर्मियों के करीब 20 पदों पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।

इस समय जनपद के 15 विकासखंडों के लिए 15 टीमें गठित की गई थी, लेकिन अब दस टीमें ही रह जाएंगी। सरकार के इस निर्णय पर पौड़ी निवासियों ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। स्थानीय निवासी रेशम चंद्र और गोकुल बमराड़ा आदि लोगों का कहना है कि सरकार पहाड़ी जनपदों के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, सीएमओ डॉ. बीएस जंगपांगी ने बताया कि पदों में कटौती करने संबंधी आदेश जनपद को प्राप्त हो गए हैं। इस संबंध प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। अब नजदीकी दो विकास खंडों में एक टीम कार्य करेगी।

Posted By: Jagran

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