जागरण संवाददाता, पौड़ी : विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पौड़ी जनपद में मानव जनित लगी आग से खाक हुए जंगलों के के कारण वन्य जीव आबादी वाले क्षेत्रों में दस्तक देने लगे हैं। खिर्सू ब्लॉक के बसोल्यूं तथा चौबट्टाखाल के कोलखंडी में पिंजरे में कैद हुए गुलदार इस बात की तस्दीक करते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में आए दिन गांव के आसपास गुलदार देखने की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

फायर सीजन शुरू होते ही हर वर्ष जंगल भी धू-धू कर जलने लगते हैं। दुखद पहलू यह कि वनों में आग लगने की अधिकांश घटनाएं मानव जनित होती हैं। साफ है कि वनाग्नि से छोटे-छोटे जंतुओं के अलावा रेंगने वन्य जीव की जान पर आ जाती है। इस बार वनों में लगने वाली आग की घटनाओं से जिन वन्य जीवों के आशियाने उजड़ने और आहार की उपलब्धता न होने के कारण उन्होंने आबादी की ओर दस्तक देनी शुरू कर दी है। इस वर्ष अभी तक तीन गुलदार आबादी वाले क्षेत्रों में पिंजरे में कैद हो चुके हैं। ऐसे कर सकते हैं बचाव :

गांव व घर के आसपास उगी झाडियों को नष्ट करना, रात्रि को घर के बाहर लाइट की समुचित व्यवस्था, पैदल या संपर्क मार्गो पर समूह के रूप में आवाजाही करना,

गदेरे वाले स्थानों में अकेला जाने से बचना, बच्चों को सायं के वक्त अकेला न छोड़ना आदि, ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को स्कूल तक भेजना व वापस लाना आदि। एक मृत तथा चार लोग हुए घायल

गढ़वाल वन प्रभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष अभी तक विभिन्न रेंजों में गुलदार के हमले में एक व्यक्ति की मौत तथा चार लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में आबादी वाले क्षेत्रों से वन विभाग की ओर से तीन गुलदारों को ¨पजड़े में कैद भी किया गया है। विभाग को जगह-जगह गुलदार दिखाई देने की सूचना मिलने के बाद से अब कई ग्रामीण क्षेत्रों में ¨पजरा लगाने की मांग भी होने लगी है। जंगलों में लगी आग के चलते वन्य जीवों का सुरक्षित स्थानों में आना स्वाभाविक बात है। गुलदार द्वारा हमले की कुछ घटनाएं हुई हैं। उन स्थानों पर वनकर्मियों को मुस्तैद कर दिया गया है। साथ ही लोगों को एहतियात बरतने को कहा गया है।

लक्ष्मण ¨सह रावत, डीएफओ, गढ़वाल वन प्रभाग, पौड़ी गढ़वाल।

By Jagran