कोटद्वार, जेएनएन। प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत को मुख्यमंत्री पद से 'वैराग' हो गया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में उनकी सक्रियता पहले जैसी रहेगी, लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए अब जोड़-तोड़ नहीं करेंगे। 

अपने कैंप आवास में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए काबीना मंत्री हरक सिंह ने अभी तक के राजनीतिक सफर के किस्से बेबाकी से बयां किए। मुख्यमंत्री नहीं बन पाने की कसक उनकी बातों में साफ तौर पर झलकी। उन्होंने न केवल अतीत की अपनी राजनीतिक यात्रा पर, बल्कि भविष्य की योजनाओं पर खुलकर चर्चा की। 

मौजूदा सरकार में काबीना मंत्री ने कहा कि राज्य गठन के बाद के 18 साल के वक्फे में कई अवसरों पर उन्होंने स्वयं को मुख्यमंत्री की कुर्सी के बेहद करीब पाया। लेकिन, अगले ही पल कुछ ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम घटा कि वे मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर हो गए। 

वह बोले, उन्होंने सीएम बनने के लिए कई बार बिसात बिछाई, लेकिन अंतिम समय बाजी पलट गई। कभी राजनीतिक समीकरण बदल गए तो कभी उनके मोहरे पिट गए। इसके चलते वह सीएम की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए। 

काबीना मंत्री ने कहा कि पिछले अनुभवों से सबक लेते हुए अब उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने के लिए जोड़-तोड़ करनी छोड़ दी है। जब जनता के साथ ही ऊपर वाले का आशीर्वाद मिलेगा, वह मुख्यमंत्री बन जाएंगे। लोकसभा चुनावों को लेकर हुई चर्चा में उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान उन्हें लोकसभा प्रत्याशी के रूप में गढ़वाल सीट से चुनावी मैदान में उतारती है तो वे चुनाव लड़ेंगे।

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Posted By: Bhanu

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