कोटद्वार, अजय खंतवाल। कहते हैं कि अगर दिल में कुछ करने का जज्बा हो तो मिट्टी को भी सोना बनाया जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है पौड़ी के कुछ युवाओं ने। विजेंद्र, संदीप, संतोष और मनीष ऐसे चार युवा हैं, जिनकी रोजी-रोटी कोरोना की भेंट चढ़ गई। बावजूद इसके इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और गांव में निष्प्रयोज्य पड़े गोबर के ढेरों में अपनी आर्थिकी का जुगाड़ ढूंढ लिया। आज चारों युवा गोबर के दीपक बनाकर उनसे अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं।

प्रखंड द्वारीखाल की बड़ी ग्रामसभाओं में शामिल है ग्रामसभा बमोली। करीब सौ परिवारों वाले इस गांव की आबादी बारह सौ से अधिक है। ग्राम बमोली के निवासी विजेंद्र रावत लॉकडाउन से पहले हरिद्वार, संदीप हिमाचल प्रदेश में नौकरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। मनीष और संतोष दिल्ली में नौकरी करते थे। लॉकडाउन हुआ तो चारों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया और चारों घर वापस लौट आए। खेतीबाड़ी का अनुभव नहीं था, इस कारण खेती में भविष्य तलाशने की जरूरत महसूस नहीं की, लेकिन गांव में रोजगार का प्रबंध करना इन युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बन गई।

ऐसे में सतपुली निवासी नीलम सिंह नेगी 'नीलकंठ' इन युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरणें लेकर आईं। ग्राम प्रधान विनीता रावत के सहयोग से इन युवाओं ने नीलम सिंह नेगी से गोबर से दीपक बनाने का प्रशिक्षण लिया और गांव में ही दीपक तैयार करने शुरू कर दिए। ग्राम प्रधान विनीता बताती हैं कि सौ परिवारों वाली इस ग्रामसभा में प्रत्येक घर में दो-तीन गाय हैं। ऐसे में गांव में गोबर की कोई कमी नहीं है। बताया कि इन दिनों नीलम सिंह नेगी ने ही इन युवकों को दीपक बनाने के ऑर्डर दिए हैं और युवक उन्हें ही गोबर के दीपक बनाकर सप्लाई कर रहे हैं। बताया कि अब कोटद्वार से भी दीपक के ऑ र्डर आ रहे हैं। दीये बना रहे इन युवकों ने बताया कि भी उन्हें दीये बनाते हुए मात्र एक सप्ताह का समय हुआ है और इस एक सप्ताह में वे दो हजार दीयों की सप्लाई कर चुके हैं, जबकि तीन हजार दिए अगले एक-दो दिनों में भेज दिए जाएंगे।

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 अन्य ग्रामीणों में पनप रहा उत्साह

द्वारीखाल प्रखंड के ग्राम बमोली में इन दिनों गोबर से दिए बनाने को लेकर खासा उत्साह नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि पूरे दिन चारों युवक गोबर से दिए बनाते हैं व रात में अन्य ग्रामीण इनसे दिए बनाने की डाई लेकर अपने घरों में दिए बनाते हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कि वर्तमान में दिए बनाने के लिए छह डाई का प्रयोग किया जा रहा है, लेकिन जिस तरह अन्य ग्रामीण भी दिए बनाने में दिलचस्पी ले रहे हैं, अतिरिक्त डाई का प्रबंध किया जा रहा है।

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