संवाद सहयोगी, कोटद्वार: घनी आबादी क्षेत्र से गुजर रहा पनियाली गदेरा रविवार को एक बार फिर उफान पर आ गया। जिससे उससे सटी बस्तियों में रहने वाले लोग दहशत में आ गए। पिछले तीन वर्षो से प्रतिवर्ष बरसात में पनियाली गदेरा तांडव मचा रहा है और इस दौरान यह ग्यारह जिदगी लील चुका है। हालांकि इसके पीछे लोग और प्रशासन दोनों ही जिम्मेदार हैं। क्योंकि प्रशासन की नाक के नीचे ही इस गदेरे की जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि प्रशासन भी मानता है कि गदेरे में अतिक्रमण है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर प्रशासन आज तक मात्र चिह्निकरण ही कर पाया है। प्रशासन की ओर से पिछले दो वर्षों में पनियाली गदेरे में 54 अतिक्रमण चिह्नित किए गए। विभागीय लापरवाही या दरियादिली

पनियाली गदेरे में सरकारी सिस्टम प्रतिवर्ष बाढ़ सुरक्षा दीवार का निर्माण तो करता है, लेकिन दीवार निर्माण से पूर्व अतिक्रमण हटाने की जहमत नहीं उठाता। सिस्टम की इस दरियादिली का परिणाम यह होता है कि अतिक्रमणकारी सुरक्षा दीवार पर भी अतिक्रमण कर देता है। पनियाली गदेरे से हुई तबाही

-वर्ष 1988 में पनियाली गदेरे में आई बाढ़ से दो व्यक्तियों की मौत। गदेरे से सटे क्षेत्रों में भारी नुकसान

-वर्ष 1993-94 में गदेरे में आई बाढ़ से निचले क्षेत्रों में कई घरों में पानी भर गया।

-16 सितंबर 2012 को गदेरे का पानी सूर्या नगर व कौड़िया क्षेत्र में भरा, भारी नुकसान

-अगस्त 2017 को पनियाली गदेरे से आई बाढ़ के कारण सात की मौत, पूरे क्षेत्र में जलभराव, हजारों घरों में भरा मलबा

-अगस्त 2018 में पनियाली गदेरे के उफान पर आने के बाद कई घरों में मलबा घुसा, एक महिला की मौत

-जुलाई 2019 में घर में गदेरे का पानी भर जाने के बाद सामान बाहर निकाल रहे तीन युवकों की करंट लगने से मौत सिचाई विभाग व नगर निगम की ओर से संयुक्त सर्वे कर अतिक्रमण चिह्नित किया गया। सिचाई विभाग की ओर से अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वयं अतिक्रमण न हटाया तो बल का प्रयोग कर अतिक्रमण हटवाया जाएगा।

योगेश मेहरा, उपजिलाधिकारी, कोटद्वार

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