जागरण संवाददाता, कोटद्वार: उत्तराखंड के युवाओं को सेना भर्ती के दौरान कद में मिल रहे छूट के लाभ को उत्तर प्रदेश के युवा हथियाने की फिराक में हैं। फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से युवा उत्तराखंड में होने वाली भर्ती रैलियों में शामिल होकर सेना में भर्ती होने का प्रयास कर रहे हैं। फर्जी प्रमाणपत्र बनाने से फौज में भर्ती कराने तक के लिए कुछ लोग इन युवाओं से मोटी सौदेबाजी भी कर रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि सेना भर्ती के नाम पर उत्तराखंड के फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जा रहे हैं, लेकिन उत्तराखंड के सरकारी सिस्टम को पूरे मामले की जांच के लिए आज भी सेना की लिखित शिकायत का इंतजार है।

उत्तर प्रदेश में सेना में भर्ती होने के लिए ऊंचाई 170 सेंटीमीटर होनी चाहिए, जबकि उत्तराखंड में इसके लिए 163 सेंटीमीटर रखी गई है। उत्तराखंड में सेना भर्ती के दौरान कद में इस छूट का फायदा उत्तर प्रदेश के युवाओं को दिलाने के लिए एक बड़ा गिरोह उत्तर प्रदेश में सक्रिय है। मंगलवार को गढ़वाल रायफल्स रेजीमेंटल सेंटर के कौड़िया स्थित विक्टोरिया क्रास विजेता गबर ¨सह कैंप में चल रही भर्ती रैली के दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों के साथ दबोचे गए उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों से आए कुछ युवकों ने यह बात कही। भर्ती रैली के दौरान मंगलवार को हरिद्वार जनपद के साथ ही देहरादून की विकासनगर तहसील के युवाओं की भर्ती थी। भर्ती के दौरान एक युवक के मूल निवास प्रमाण पत्र में दिए गए तथ्यों पर सैन्य अधिकारियों को संदेह हुआ तो उन्होंने युवक से कड़ाई से पूछताछ की। युवक ने स्वयं को अलीगढ़ का बताते हुए अपने साथ आए बीस अन्य लड़कों के बारे में अधिकारियों को बता दिया। तत्काल हरकत में आए सेना के जवानों ने इन सभी 21 युवकों को दबोच लिया। पूछताछ के दौरान जो तथ्य सामने आए, उससे सैन्य अधिकारी भी हतप्रभ रहे गए।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, अलीगढ़, बुलंदशहर व शामली से पहुंचे इन युवकों का कहना था कि कद कम होने से उन्हें उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाली भर्ती रैलियों में शामिल होने का मौका नहीं मिल पाता। बताया कि अलीगढ़ व बुलंदशहर क्षेत्र में कुछ लोगों ने उन्हें उत्तराखंड में चल रही सेना भर्ती रैली में शामिल कराने की बात कही। बताया कि उत्तराखंड क्षेत्र के प्रपत्र बनाने के नाम पर पांच से दस हजार रुपए लिए गए। युवकों का कहना था कि उन्हें सिर्फ दौड़ क्लीयर करनी थी व उसके बाद उन्हें भर्ती कराने की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं लोगों की थी। बताया कि भर्ती होने के बाद उन्हें तीन से चार लाख रुपये इन लोगों को देने थे। सिस्टम की नहीं टूट रही चुप्पी

उत्तर प्रदेश में उत्तराखंड की विभिन्न तहसीलों के फर्जी मूल निवास, स्थाई निवास प्रमाण पत्र बनाने का गोरखधंधा जोरों पर है, लेकिन उत्तराखंड का सरकारी सिस्टम इस ओर से पूरी तरह मुंह मोड़े हुए है। आलम यह है कि सेना फर्जी प्रमाणपत्र लेकर पहुंचे युवाओं को चेतावनी देकर छोड़ रही हैं, लेकिन प्रशासन इस पूरे गोरखधंधे की ओर से पूरी तरह आंखें मूंदे हुए है। सेना के साथ धोखाधड़ी का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में सेना को ही इस संबंध में शिकायत करनी चाहिए, ताकि प्रशासन मामले की जांच कर सके। सेना की शिकायत के बिना किसी भी तरह की जांच संभव नहीं है।

सुशील कुमार, जिलाधिकारी, पौड़ी'

Posted By: Jagran

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