यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 14, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'द्वी हजार आठ भादों मास बौगीन खास'
संवाद सूत्र, सतपुली : 'द्वी हजार आठ (संवत)भादो मास, सतपुली मोटर बगीन खास..' ये गढ़वाली गीत की पंक्ति

संवाद सूत्र, सतपुली : 'द्वी हजार आठ (संवत)भादो मास, सतपुली मोटर बगीन खास..' ये गढ़वाली गीत की पंक्तियां 14 सितंबर 1951 को नयार घाटी में आई बाढ़ की चपेट में आए तीस चालक- परिचालकों की याद में लिखी गई हैं। बुधवार को बहे लोगों याद में सतपुली के समीप ही बिजलीघर परिसर में इन मोटर मजदूरों की याद में आयोजित श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर मौजूद लोगों ने अनायास काल का ग्रास बने इन लोगों की आत्मा की शांति को भगवान से प्रार्थना की।
दरअसल, वर्ष 1951 में जिला मुख्यालय पौड़ी से गढ़वाल ऑनर्स यूनियन लिमिटेड को अपने वाहनों की जांच कराने के निर्देश जारी हुए। कंपनी ने वाहन स्वामियों को इन निर्देशों से अवगत कराया व वाहन स्वामियों ने चालक-परिचालकों को बसें लेकर पौड़ी के लिए रवाना कर दिया। 13/14 ¨सतबर 1951 को पौड़ी की ओर रवाना हुए 22 चालक-परिचालकों ने रात्रि में अपने वाहन सतपुली में नयार नदी के किनारे खड़े कर दिए। रात में भयंकर बारिश हुई व नयार में बाढ़ आ गई। बाढ़ नदी किनारे खड़ी 22 बसों के साथ ही तीस चालक -परिचालकों को भी तेज बहाव में बहा ले गई। उस दौर में यह एक बड़ी आपदा मानी गई व गढ़वाल मोटर ट्रांसपोर्ट यूनियन ने साठ के दशक में एक शिलालेख सतपुली के निकट सिमराली तोक में स्थापित किया था। तब से प्रतिवर्ष इस शिलालेख में 14 सितम्बर को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है।
इसी क्रम में आज बुधवार को स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर एडवोकेट मुकेश मिश्रा, शिक्षक विनोद घिल्डियाल, अरुण उनियाल, महिपाल रावत, देवेंद्र भंडारी, सुशील थलेड़ी, एपी घायल, गणेश काला सहित विद्युत विभाग और शिक्षा विभाग के कई लोगों ने काल का ग्रास बने लोगों की आत्मा की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना की।
