हल्द्वानी, जेएनएन : कई बार स्टेशनों के टिकट काउंटर पर लंबी लाइन लगी होने के कारण यात्री टिकट नहीं ले पाते हैं और उसी बीच उनकी ट्रेन के छूटने का समय हो जाता है। ऐसी आपात परिस्थिति में यात्री के पास मात्र दो विकल्प बचते हैं। पहला या तो वह बिना टिकट लिए ट्रेन में सवार हो जाए या फिर अपनी यात्रा कैंसिल कर दे। ऐसी परिस्थितियां किसी भी यात्री के लिए काफी दिक्कत वाली होती है, लेकिन अब यात्रियों को इस दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। 
रेलवे इज्जतनगर मंडल के पीआरओ राजेंद्र सिंह ने बताया कि भारतीय रेलवे के नियम के अनुसार इमरजेंसी की स्थिति में अब यात्री प्लेटफार्म टिकट से भी यात्रा कर सकते हैं। प्लेटफार्म टिकट से यात्रा करने के लिए यात्री को गार्ड से अनुमति पत्र लिए जाने की आवश्यकता होती हैं, लेकिन यदि यात्री के पास इसका समय नहीं है तो वह सीधे ट्रेन में चढ़कर वहां नियमानुसार जरूरी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। 
पीआरओ के अनुसार ट्रेन में सवार होने के बाद सर्वप्रथम यात्री को टीटीई से मिलकर उसे पूरी जानकारी देनी होती है। जिसके बाद टीटीई यात्री को टिकट बनाकर देता है। इसके लिए यात्रा के वास्तविक किराये के साथ 250 रुपये पेनाल्टी के रूप में देने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि यात्री जिस श्रेणी में सफर कर रहे हैं, किराया उसी श्रेणी का होगा और जिस स्टेशन से यात्री चढ़े हैं उसे बोर्डिंग स्टेशन माना जाएगा। इसके अलावा यह टिकट यात्री को यात्रा की अनुमति तो देता है, लेकिन सीट के आरक्षण की गारंटी नहीं देता। अर्थात सीट न मिलने की जिम्मेदारी रेलवे की नहीं होगी।

इन बातों का रखें ध्यान
अगर कोई रेलवे को धोखा देकर अपने पैसे बचाने के लिए प्लेटफार्म टिकट से यात्रा करता है तो उसे जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। यदि टीटीई को यह पता चलता है कि यात्री जानबूझकर प्लेटफार्म टिकट से यात्रा कर रहा है और उसने प्लेटफार्म टिकट को यात्रा टिकट में नहीं बदलवाया है तो उस पर 1,260 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। मामला बढऩे पर यात्री को 6 साल तक की सजा भी हो सकती है या जुर्माना और सजा दोनों हो सकती है।

Posted By: Skand Shukla