अल्मोड़ा, जेएनएन : वीर चक्र से सम्मानित जांबाज बुद्ध सिंह का 102 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह आजादी से पूर्व कुमाऊं रेेजिमेंट में भर्ती हो गए थे। उत्तर व दक्षिण कोरिया के बीच छिड़ी जंग में बुद्ध सिंह ने संयुक्त राष्ट्र संघ के आह्वान पर भारतीय सेना की ओर से अदम्य साहस का परिचय देते हुए केआरसी की गौरवशाली परंपरा को नई ऊंचाई दी थी। वीर योद्धा ने अपने पैतृक गांव में अंतिम सांस ली।

उत्तर व दक्षिण कोरिया के बीच लड़ चुके हैं युद्ध

लखरकोट गांव (स्यालदे ब्लॉक) निवासी बुद्ध सिंह ने रविवार को दुनिया से विदा ले ली। वह 1939 में कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। 25 जून 1950 में उत्तर व दक्षिण कोरिया के बीच युद्ध छिड़ गया था। उस दौर में बुद्ध सिंह 60 पैरा आर्म्‍ड फोर्स में तैनात थे। भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र के आह्वान पर भेजी गई सेना में बुद्ध सिंह ने वर्ष 1951 तक अपनी जांबाजी दिखाई। उनकी वीरता को देखते हुए बुद्ध सिंह को कोरिया की फॉरवर्ड पोस्ट पर भेजा गया। उनकी बहादुरी के किस्से तब देश की राजधानी दिल्ली तक कहे सुने जाने लगे। इसी का परिणाम रहा कि छह अगस्त 1953 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सरकार में उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

आज किया गया अंतिम संस्‍कार

बुद्ध सिंह सेना में रहते हुए वर्ष 1958 में लांसनायक पद से सेवानिवृत्त हुए। उनके तीन पुत्र तेग सिंह, आनंद सिंह व श्याम सिंह व नाती-पोतों का परिवार है। परिवार के सदस्यों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार सोमवार को सुबह दस बजे निकटवर्ती कुलंटेश्वर घाट पर किया जाएगा। बुद्ध सिंह के निधन पर पूर्व सैनिकों के साथ ही तमाम सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने शोक संवेदना जताई है।

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