हल्द्वानी, जेएनएन : परिवहन निगम के बेड़ों में नई बसें शामिल होने का इंतजार खत्म हुआ। हल्द्वानी पहुंची दस बसों की पहली खेप को परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने हरी झंडी दिखाकर उनका लोकार्पण किया। इनमें से चार टनकपुर व छह कुमाऊं मंडल को सौंपी गई। निगम के बेड़ों में कुल 300 नई आधुनिक बसें शामिल होनी हैं।

रोडवेज स्टेशन हल्द्वानी पर आर्य ने बसों में महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए पैनिक बटन व सीसीटीवी कैमरों के अलावा अन्य सुविधाओं के बारे में भी यात्रियों को जानकारी दी और कहा कि बसों की मॉनीटरिंग के लिए जीपीएस सिस्टम लगाए गए हैं। जिससे बस की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी। निगम के जीएम दीपक जैन ने बताया कि प्रथम चरण में 150 बसों को बेड़े में शामिल किया गया है। इनमें से 50 बसें देहरादून, 65 बसें कुमाऊं व 35 बसें टनकपुर क्षेत्र को आवंटित की जाएंगी। इस महीने के अंत तक निगम के बेड़ों में सभी बसें शामिल हो जाएंगी। इस अवसर पर मेयर डॉ. जोगेंद्र रौतेला, पार्षद तन्मय रावत, प्रदीप बिष्ट, दर्जा राच्य मंत्री प्रकाश हर्बोला, तरुण बंसल, विजय मनराल, एसएम मुकुल पंत, आरएम संचालन कुमाऊं यशपाल सिंह, एसएम तकनीकी कुमाऊं एमके पंत सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

रोडवेज की नई बसें कम करेंगी प्रदूषण

परिवहन निगम के बेड़ों शामिल होने वाली कुल तीन सौ नई बसें एग्जॉस्ट गैस रिसाइकिलिंग (ईजीआर) सिस्टम से लैस होंगी। इस प्रणाली से पहले की अपेक्षा वायु प्रदूषण कम होगा। वर्तमान में निगम के बेड़ों में करीब 1419 बसे हैं। जिनमें से तीन सौ बसें नीलामी की कगार पर पहुंच चुकी हैं। मौजूदा बसों में आधुनिक तकनीक न होने की वजह से ये यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा के लिहाज से कमजोर तो हैं ही, साथ पर्यावरण के लिए भी हानिकारक साबित हो रही हैं। इन बसों से निकलता धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता हैं। नई बसों में इस तरह की दिक्कत नहीं होगी।

ईजीआर सिस्टम

यह तकनीक वाहन से निकलने वाले धुएं में मौजूद कार्बनडाइ ऑक्साइड, सल्फरडाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी घातक गैसों को रिसाइकिल कर साफ धुआं बाहर की ओर छोड़ती है। जिससे प्रदूषण का स्तर बहुत ही कम हो जाता हैं।

फायर डिडेक्ट एंड अलार्म

नई बसों में फायर डिडेक्ट एंड अलार्म सिस्टम लगे हैं। बस में किसी भी तरह का शॉट सर्किट होने पर तत्काल अलार्म बजने लगेगा। अलार्म द्वारा तुरंत सूचना प्राप्त हो जाने से किसी भी तरह की बड़ी दुर्घटना से बचा जा सकता है। 

डबल रूफ हैच

बेड़ों में शामिल होने वाली नई बसों की छत पर डबल रूफ हैच दिए गए हैं। इन रूफ हैच से यात्रियों को आपातकालीन स्थिति में बस से बाहर निकलने में आसानी होगी। यानी अगर बस कहीं दुर्घटनाग्रस्त हो गई और उसके मेन व आपातकालीन दरवाजे किसी कारण से जाम हो गए तो ऐसे में बस की छत पर मौजूद डबल रूफ हैच को खोलकर यात्री उससे बाहर निकल सकेंगे।

डोर अलार्म

इन सभी बसों में डोर अलार्म लगे होंगे। यदि किसी कारण गेट बंद नहीं हुआ तो अलार्म बजने लगेंगे। ऐसे में परिचालक को बार-बार दरवाजा बंद हुआ कि नहीं देखने की जरूरत नहीं होगी।

मल्टीप्लेक्स वायरिंग

मल्टीप्लेक्स एक ऐसी तकनीक है जो वाहनों की वायरिंग को आसान बनाती है। बसों में मल्टीप्लेक्स वायरिंग के कारण वाहन में शॉट सर्किट होने का पता लगाया जा सकता है, जिससे अन्य विद्युत उपकरण सुरक्षित रहते हैं। इस प्रणाली के तहत वाहन में आई किसी प्रकार की दिक्कत को ऑनलाइन सिस्टम के द्वारा चेक किया जा सकता हैं। इस प्रणाली में वाहन में आई खराबी का सीधे पता चल जाने के कारण वाहनों को सही करने में भी पहले की अपेक्षा कम समय लगता है। इसके अलावा बसों में जीपीएस, सीसीटीवी, पैनिक बटन आदि आधुनिक तकनीक भी शामिल हैं।

Posted By: Skand Shukla

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