मैदान से भी ज्यादा पहाड़ की क्यारियों में हो रहा कद्दू का उत्पादन
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों के आतंक के बावजूद मैदानी इलाकों से अधिक कद्दू का उत्पादन हो रहा है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
पहाड़ी क्षेत्रों में मैदानी इलाकों से अधिक कद्दू उत्पादन।
बंदरों का आतंक और बाजार तक पहुंचना बड़ी चुनौती।
ओखलकांडा में सर्वाधिक कद्दू उत्पादन दर्ज किया गया।
जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। पहाड़ के खेतों में बंदरों के आतंक से फसल बचाने की चुनौती है, लेकिन उसके बावजूद पहाड़ी क्षेत्रों में मैदान से भी ज्यादा कद्दू का उत्पादन किया जा रहा है। जिले में ही 329.50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सालाना 15730 क्विंटल कद्दू का उत्पादन होता है।
हल्द्वानी मंडी में पहुंचने वाला पहाड़ी कद्दू अपनी खास पहचान तो रखता है, लेकिन इसकी बिक्री आम सब्जियों की तरह नहीं होती। राष्ट्रीय कद्दू दिवस के मौके पर कद्दू की खेती से लेकर बाजार तक की तस्वीर यही बयां करती है। वर्ष 2012 से हल्द्वानी के गौलापार स्थित कुंवरपुर गांव में कद्दू की खेती कर रहे रजनीश मौर्य बताते हैं कि पहाड़ों में छोटी-छोटी क्यारियों में कद्दू की खेती की जाती है।
मैदानी क्षेत्र में खेतों में बांस के ऊपर जाल बिछाकर कद्दू की खेती होती है। कद्दू बेचने के लिए उन्हें बाजार व सब्जी मंडी आना पड़ता है। इसमें प्रतिदिन उनके 200 से 300 रुपये खर्च हो जाते हैं। किसानों की उपज को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिले तो कद्दू की खेती को प्रोत्साहन मिल सकता है।
ओखलकांडा में सबसे ज्यादा उत्पादन
उद्यान विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, कद्दू उत्पादन में ओखलकांडा सबसे आगे है। यहां 60 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 3000 क्विंटल उत्पादन दर्ज किया गया है। बेतालघाट में सबसे अधिक 61 हेक्टेयर क्षेत्रफल में उत्पादन 2850 क्विंटल रहा। सबसे कम मैदानी क्षेत्र हल्द्वानी में 26 हेक्टेयर में कद्दू की खेती होती है।
देवीधुरा और खन्स्यू के कद्दू की अलग पहचान
चंपावत के देवीधुरा और ओखलकांडा के खन्स्यू क्षेत्रों से भी पहाड़ी कद्दू हल्द्वानी मंडी पहुंचता है। मंडी के आढ़ती आनंद जोशी ने कहा इन क्षेत्रों से विशेष पहाड़ी कद्दू की सीमित आपूर्ति होती है। दो से तीन माह के दौरान करीब ढाई से पांच क्विंटल कद्दू मंडी पहुंचता है, जिसे फुटकर विक्रेता खरीदते हैं। इसकी मांग सामान्य दिनों के बजाय विशेष आयोजनों में अधिक रहती है।
यूपी से रोज आता है 200 किलो हाइब्रिड कद्दू
आलू फल आढ़ती के अध्यक्ष कैलाश जोशी ने बताया कि उत्तर प्रदेश से प्रतिदिन करीब 200 किलो हाइब्रिड कद्दू आता है। हालांकि, अन्य सब्जियों के मुकाबले इसकी मांग कम रहती है। उन्होंने बताया कि पहाड़ में बंदरों के आतंक के कारण किसानों को कद्दू की फसल बचाने में मुश्किल होती है। मेहनत से तैयार की गई उपज को बाजार तक पहुंचाना भी किसानों के लिए चुनौती है।
कद्दू (सीताफल) की ब्लाकवार स्थिति
| क्र. | ब्लाक | क्षेत्रफल (हे.) | उत्पादन (कुं.) |
| 1 | रामगढ़ | 31.50 | 1,475 |
| 2 | हल्द्वानी | 26 | 1,285 |
| 3 | भीमताल | 51 | 2,450 |
| 4 | धारी | 32 | 1,520 |
| 5 | कोटाबाग | 31 | 1,400 |
| 6 | रामनगर | 37 | 1,750 |
| 7 | ओखलकांडा | 60 | 3,000 |
| 8 | बेतालघाट | 61 | 2,850 |
| कुल | 329.50 | 15,730 | |
किसानों को कद्दू की खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें निश्शुल्क बीजों के पैकेट दिए जाते हैं। ज्यादातर कैंप के माध्यम से किसानों को बीज दिए जाते हैं। किसान अन्य फसलों के साथ कद्दू की खेती करते हैं।
-प्रेमा राना, मुख्य उद्यान अधिकारी
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