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उत्तराखंड हाईकोर्ट शिफ्टिंग का प्रस्ताव फिर खारिज, 30 हेक्टेयर जंगल बना रोड़ा

Published: Tue, 27 Oct 2026 03:54 PM (IST)

उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रीजनल इंपावर्ड कमेटी ने एक बार फिर खारिज कर दिया ...और पढ़ें

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HighLights

  1. हाईकोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने का प्रस्ताव फिर खारिज।

  2. रीजनल इंपावर्ड कमेटी ने गैर-स्थल-विशिष्ट बताकर अस्वीकारा।

  3. वैकल्पिक गैर-वन भूमि की खोज पर्याप्त नहीं पाई गई।

जागरण संवाददाता, नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल को नैनीताल से हल्द्वानी (नैनीताल) में स्थायी रूप से स्थानांतरित करने का प्रस्ताव एक बार फिर खारिज हो गया है। विचार विमर्श के बाद रीजनल इंपावर्ड कमेटी (आरईसी) की बैठक में यह प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।

दरअसल, आरईसी ने वन (संरक्षण एवं संवर्धन) नियम, 2023 के पैरा 1.10 (i) के तहत प्रस्ताव को खारिज करने का फैसला किया, क्योंकि प्रस्ताव नॉन-साइट-स्पेसिफिक पाया गया और यह भी देखा गया कि उपयुक्त वैकल्पिक गैर-वन भूमि को पर्याप्त रूप से एक्सप्लोर नहीं किया गया है।

यूजर एजेंसी/राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि उपयुक्त गैर-वन भूमि पर प्रस्तावित प्रोजेक्ट को लगाने की संभावना को एक्सप्लोर करें। हाईकोर्ट हल्द्वानी शिफ्ट का प्रस्ताव फिर से रिजेक्ट हो गया, इस बार 30 हेक्टेयर जंगल की वजह से 30.00 हेक्टेयर वन भूमि (आरक्षित वन) के डायवर्जन का प्रस्ताव, लामाचौड़ ब्लॉक, भाखड़ा रेंज, तराई केंद्रीय वन प्रभाग, हल्द्वानी, नैनीताल जिला, लोक निर्माण विभाग के पक्ष में।

प्रस्ताव का विवरण

1. प्रस्ताव सभी संबंधित अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित और संस्तुत है।
2. डीएफओ की साइट निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित वन भूमि पर वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 का उल्लंघन नहीं पाया गया।
3. प्रस्तावित वन क्षेत्र नेशनल पार्क, वन्यजीव अभयारण्य, बायोस्फीयर रिजर्व, टाइगर रिजर्व, हाथी कॉरिडोर, वन्यजीव माइग्रेशन कॉरिडोर का हिस्सा नहीं है।
4. प्रस्तावित वन क्षेत्र में संरक्षित पुरातात्विक/धरोहर स्थल, रक्षा प्रतिष्ठान या अन्य महत्वपूर्ण स्मारक नहीं है।
5. इस क्षेत्र में दुर्लभ/लुप्तप्राय/विशेष प्रजाति के पेड़-पौधे और जीव नहीं पाए गए।
6. वन भूमि की आवश्यकता का औचित्य दिया गया है।

पेड़ों का विवरण:
- कुल क्षेत्र: 30.00 हेक्टेयर
- काटे जाने वाले पेड़: 123 पेड़
- सबसे ज्यादा पीपल - 75 पेड़, शागौन - 9, बकुली - 2, धौरी - 2, बेल - 3, सेमल - 1, रोहिणी - 2, हल्दू - 2, यूकेलिप्टस - 1, कंजू - 1, अमलतास - 1, खैर - 1, कोकट - 19

NPV - नेट प्रेजेंट वैल्यू:
- 3,68,57,700 रुपये (3 करोड़ 68 लाख 57 हजार 700 रुपये)

प्रतिपूरक वनीकरण (CA):
- कुल 60.00 हेक्टेयर में होगा
- 1. औरा बासकोट, उनचाकोट, बेतालघाट - 13.495 हेक्टेयर - नैनीताल FD - 80,61,117 रुपये
- 2. कटीमा, मल्लिसेथी, बेतालघाट - 7.00 हेक्टेयर - अल्मोड़ा FD - 3,01,92,60 रुपये (प्लांटेशन एरिया 5.00 हेक्टेयर)
- 3. हल्द्यानी, जोशिक्खोला - 30.00 हेक्टेयर - अल्मोड़ा FD - 83,63,000 रुपये (14 हेक्टेयर के लिए) और 95,57,400 रुपये (16 हेक्टेयर के लिए)
- 4. धोखाने, सुयालबारी, श्री कैंचीधाम - 3.847 हेक्टेयर - नैनीताल FD - 22,97,971 रुपये
- 5. गंगरकोट, बेडुली, श्री कैंचीधाम - 2.00 हेक्टेयर - अल्मोड़ा FD - 11,62,062 रुपये
- 6. दाऊं, नैनीताल - 3.658 हेक्टेयर - रामनगर FD - 21,85,073 रुपये
- कुल: 3,46,45,883 रुपये

रोजगार:
- निर्माण चरण: स्थायी 1450, अस्थायी 49,8546 मानव दिवस
- संचालन चरण: स्थायी 300, अस्थायी 54,8700 मानव दिवस

हाईकोर्ट की ओर से क्या कहा गया:
- नैनीताल में मौजूदा हाईकोर्ट परिसर में जगह कम है, स्टाफ और बार सदस्यों की बढ़ती संख्या को समायोजित नहीं कर पा रहा
- केस 2010 में करीब 4,000 थे, अब बढ़कर 64,000 हो गए हैं
- नैनीताल पर्यटन स्थल होने से वादियों को रहने का खर्च ज्यादा पड़ता है, और बार-बार ट्रैफिक जाम की समस्या होती है
- प्रस्तावित बिल्डिंग G+7 (ग्राउंड + 7 मंजिल) की होगी, पर्याप्त पार्किंग और खुले क्षेत्र के साथ, भविष्य के विस्तार को देखते हुए
- इस प्रोजेक्ट में कोई आवासीय निर्माण नहीं होगा

कमेटी ने क्या सवाल उठाए:
1. क्या प्रस्तावित क्षेत्र हाथी कॉरिडोर में आता है? वन विभाग ने कहा, इस स्थिति को वेरिफाई करना होगा।
2. नैनीताल में मौजूदा हाईकोर्ट की जमीन की कानूनी स्थिति क्या है? यूजर एजेंसी ने कहा, समय आने पर कन्फर्म किया जाएगा, और शिफ्ट होने के बाद राज्य सरकार फैसला लेगी कि इसे वन विभाग को ट्रांसफर किया जाए या नहीं।
3. जब इसी तहसील में प्रतिपूरक वनीकरण के लिए 13.495 हेक्टेयर और 7.00 हेक्टेयर गैर-वन भूमि मिली है, तो हाईकोर्ट के लिए गैर-वन भूमि क्यों नहीं मिली?
4. डीएम ने 30 हेक्टेयर गैर-वन भूमि एक साथ न मिलने का प्रमाण पत्र दिया है, लेकिन कमेटी संतुष्ट नहीं हुई। कमेटी ने कहा, अल्टरनेटिव गैर-वन स्थल पर्याप्त रूप से एक्सप्लोर नहीं किए गए।

पहले वाला प्रस्ताव भी रिजेक्ट हो चुका था:
- पहले वाला प्रस्ताव नंबर FP/UK/OTHERS/435756/2023, गौलापार, हल्द्वानी में था, 24.01.2024 को REC ने रिजेक्ट कर दिया था
- उसमें 4238 पेड़ काटने थे, और आवासीय निर्माण का भी प्रावधान था
- अब इस नए प्रस्ताव में 30 हेक्टेयर आरक्षित वन में 123 पेड़ काटने हैं

कमियां (Shortcomings):
- कम्पोनेंट का ब्रेकअप ठीक से नहीं भरा
- पार्ट-1 में आवेदक श्री अशोक कुमार, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी लिखा है, लेकिन अथॉरिटी लेटर श्री प्रत्यूष कुमार के नाम पर अपलोड है
- HoFF की संस्तुति नहीं दी गई
- KML फाइल में प्रस्तावित डायवर्जन क्षेत्र और मौजूदा सड़क के बीच गैप है, भविष्य में अतिक्रमण हो सकता है
- विस्तृत लेआउट प्लान नहीं दिया गया, सिर्फ टेन्टेटिव प्लान दिया गया है
- वन्यजीव प्रबंधन योजना (WLMP) CWLW से हस्ताक्षरित करके देनी होगी
- मृदा संरक्षण योजना (SMCP) DFO से हस्ताक्षरित करके देनी होगी
- 20 साल की प्लांटेशन स्कीम देनी होगी
- प्रस्तावित डायवर्जन क्षेत्र नॉन-साइट स्पेसिफिक है, इस पर वन (S&S) नियम 2023 का पैरा 1.10 लगता है
- गैर-वन भूमि पर वैकल्पिक स्थल एक्सप्लोर नहीं किया गया
- वन भूमि पर प्रस्ताव रखने का औचित्य साफ नहीं दिया गया