जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : Uttarakhand Police daroga bharti : वर्ष 2015 में हुई दारोगा सीधी भर्ती में धांधली कर नौकरी पाने वालों पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है। विजिलेंस ने मामले में दारोगाओं पर एफआइआर दर्ज करने के लिए शासन से अनुमति मांगी है।

रिश्वतखोरी के मामले में कुमाऊं ने पिछले चार साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। वर्ष 2022 में अब तक सबसे अधिक छह राजपत्रित अधिकारी व कर्मचारियों को उत्तराखंड सर्तकर्ता अधिष्ठान (विजिलेंस) गिरफ्तार की चुकी है।

उत्तराखंड में विजिलेंस 1979 में अस्तित्व में आ गई थी। तब इसे उत्तरप्रदेश सतर्कता अधिष्ठान कुमाऊं के नाम से जाना जाता था। पहले पुलिस अधीक्षक आइपीएस टी गुडटे रहे। राज्य गठन के बाद इसका नाम बदलकर उत्तराखंड सर्तकता अधिष्ठान कुमाऊं हो गया।

नौ नवंबर 2000 में पहली नियुक्ति यूपीएस अशोक कुमार राघव के रूप में हुई। मौजूदा समय में आइपीएस प्रहलाद नारायण मीणा पुलिस अधीक्षक तैनात हैं। कुमाऊं में पिछले पांच सालों में रिश्वतखोरों को पकडऩे में विजिलेंस की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। शिकायत मिलने पर घेराबंदी कर आरोपितों को रंगेहाथ पकड़ा गया है।

दारोगा भर्ती घाेटाला मामला

वर्ष 2015 में 349 दरोगाओं की सीधी भर्ती हुई थी। शुरुआत में ही इसमें धांधली की बात उठी, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते मामला दब गया। इस बीच अब एसटीएफ ने जब स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा की जांच शुरू की तो इस भर्ती में भी धांधली की बात सामने आई। पांच साल में हुई गिरफ्तारी

वर्ष गिरफ्तारी

2018 05

2019 03

2020 02

2021 02

2022 06

मीणा के कार्यकाल में सबसे अधिक गिरफ्तारी

विजिलेंस ने पिछले पांच सालों में सबसे अधिक छह राजस्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा तीन वन विभाग व चार लोक निर्माण विभाग के शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक प्रहलाद नारायण मीणा के कार्यकाल में सबसे अधिक छह गिरफ्तारियां हुई हैं। मीणा के अनुसार उनका लक्ष्य रिश्वतखोरों को सलाखों के पीछे भेजना है।

52 प्रतिशत मामलों में आरोपितों को सजा

विजिलेंस के पुलिस अधीक्षक प्रहलाद मीणा ने बताया कि कुमाऊं परिक्षेत्रीय टीम का रिजल्ट अच्छा रहा है। रिश्वतखोरी के 52 प्रतिशत मामलों में आरोपितों को सजा हुई है। ठोस सबूत जुटाकर आरोपितों पर कार्रवाई की जाती है।

दारोगा भर्ती घोटाले की जांच शुरू

प्रहलाद नारायण मीणा पुलिस अधीक्षक ने बताया कि दारोगा भर्ती घोटाले की जांच शुरू हो गई है। दारोगाओं पर एफआइआर दर्ज करने के लिए शासन से अनुमति मांगी है। इसके अलावा पिछले पांच साल में रिश्वतखोरों की गिरफ्तारी बढ़ी हैं।

Edited By: Skand Shukla