उत्तराखंड की सड़कों पर सुरक्षा कवच, 2707 किमी क्रैश बैरियर की तत्काल जरूरत
उत्तराखंड में 2707 किमी लंबी सड़कों पर क्रैश बैरियर लगाने की आवश्यकता है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क हादसों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं।


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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। सड़क सुरक्षा के लिहाज से क्रैश बैरियर को अहम माना जाता है। खासकर पर्वतीय क्षेत्र में इनका महत्व ज्यादा है। यहां तेज रफ्तार या किन्हीं कारणों से चालक के नियंत्रण खो देने पर गाड़ी सीधी खाई की तरह बढ़ जाती है। ऐसे में मृतकों व घायलों की संख्या बढ़ जाती है।
वहीं, सड़क सुरक्षा के प्रयासों से जुड़ी रिपोर्ट पर नजर डालें तो स्थिति अब भी चिंताजनक है। उत्तराखंड में 2707 किमी सड़कों को अब भी सुरक्षा यानी क्रैश बैरियर की जरूरत है। शासन स्तर पर हुई बैठक में सड़क सुरक्षा संबंधी कामों में तेजी के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तराखंड में कई विभागों के पास सड़कों का स्वामित्व है। लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड (एनएच डिवीजन), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ), राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआइडीसीएल), सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अलावा स्थानीय स्तर पर निकाय भी सड़कों का निर्माण और देखरेख की जिम्मेदारी निभाते हैं।
अहम सड़कों पर सुरक्षा उपाय के तौर पर क्रैश बैरियर को भी शामिल करना जरूरी है। ताकि तेज रफ्तार वाहन खाई या गड्ढे में न समा जाए। समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग रोड एजेंसी से जुड़ी 8422.78 किमी लंबी सड़कों को क्रैश बैरियर से कवर किया जाना था। अगस्त 2026 तक 5714.96 किमी को कवर किया जा चुका है। 2707.82 किमी सड़कों का काम होना बाकी है।
सुरक्षा उपाय होने पर टल सकते थे हादसे
अल्मोड़ा के मरचूला में नवंबर 2024 में बस हादसे में 36 लोगों की जान गई थी। घटना के बाद सुरक्षा उपाय हुए
जनवरी 2025 में मटियाली बैंड में हुए हादसे में दो युवकों की मौत। जांच के दौरान क्रैश बैरियर नहीं पाए गए थे
जुलाई 2025 में पिथौरागढ़ के मुवानी में वाहन के खाई में गिरने से आठ की मौत, मौके पर पैराफिट-बैरियर नहीं थे
मई 2026 में बागेश्वर के आरे-द्यांगण मार्ग पर हादसे में मासूम की मौत। सड़क किनारे पैराफिट या बैरियर नहीं था।
क्रैश बैरियर का मतलब
लोनिवि के इंजीनियर कमल पाठक के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों में पैराफिट के मुकाबले क्रैश बैरियर ज्यादा महत्वपूर्ण है। पहाड़ी इलाकों की सड़कें संकरी होती हैं। कंक्रीट से तैयार पैराफिट ज्यादा जगह घेरते हैं। जबकि क्रैश बैरियर कम स्थान पर लग जाते हैं। जमीन के अंदर इनकी गहराई 1.10 मीटर होती है। इसलिए मजबूत भी होते हैं। इनमें कार समेत अन्य हल्के वाहनों को रोकने की क्षमता होती है।
हादसों पर लगाम कसने को क्रैश बैरियर की अहम भूमिका है। पर्वतीय क्षेत्रों में इनका महत्व और बढ़ जाता है। पांच अक्टूबर को देहरादून में बैठक भी हुई थी। संबंधित रोड एजेंसी के माध्यम से छूटे हिस्से में काम किया जाएगा। - सुनील शर्मा, उप परिवहन आयुक्त
