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डिस्टेंस एजुकेशन में पहाड़ की बेटियों आगे, 35520 छात्रों के मुकाबले 48287 छात्राएं रजिस्टर

Published: Fri, 04 Sep 2026 12:09 PM (IST)

मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा पद्धति में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है।

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सुमित जोशी, हल्द्वानी। मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा पद्धति ने पढ़ाई को सुलभ और सुगम बना दिया है। घर बैठे अध्ययन सामग्री एवं रिकार्डेड लेक्चरों की सुविधा ने पढ़ाई में आने वाली भौगोलिक और सामाजिक बाधाओं को खत्म किया है।

ऐसे में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं दूरस्थ माध्यम से शिक्षा ग्रहण करने में आगे आ रही हैं। उच्च शिक्षा लेकर उनका ज्ञान तो समृद्ध हो रहा है साथ ही आत्मनिर्भरता की उड़ान भी भर रही हैं। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की सेंटर फार इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस (सीका) की वार्षिक रिपोर्ट से इसकी पुष्टि हुई है।

सीका की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में विश्वविद्यालय में कुल 83,807 विद्यार्थियों का पंजीकरण था। जिसमें से 48287 छात्राएं और 35520 छात्र अध्ययनरत थे। इनमें स्नातक कक्षाओं में सर्वाधिक 53239 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे थे। इसमें 28236 छात्राएं थीं।

 

वहीं, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में 19756 छात्राएं और 9657 छात्र अध्ययन कर रहे थे। डिप्लोमा और प्रमाण पत्र कोर्सों में कुल 1155 विद्यार्थियों का पंजीकरण था। इसमें छात्रों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही, लेकिन डिग्री कोर्स करने को लेकर महिला शिक्षार्थियों की रुचि अधिक है। इधर, विश्वविद्यालय के पिछले 20 वर्षों का आंकड़ा देखें तो 8.80 लाख शिक्षार्थियों ने यहां से पढ़ाई की है। जिसमें से 4.67 लाख छात्राएं और 4.12 लाख छात्र शामिल रही हैं।

स्नातकोत्तर में संस्कृत शिक्षा को लेकर क्रेज

सीका की रिपोर्ट में स्नातकोत्तर कक्षाओं में कला संकाय में सबसे ज्यादा विद्यार्थियों का प्रवेश रहने की पुष्टि की गई है। जिसमें पिछले वर्ष सर्वाधिक 6233 विद्यार्थियों का एमए संस्कृत में प्रवेश था। जिसमें 4154 महिला विद्यार्थियों ने संस्कृत शिक्षा को लेकर रुचि दिखाई। दूसरे नंबर पर 3831 छात्राओं का राजनीतिक विज्ञान और तीसरे स्थान पर 2369 अंग्रेजी में अध्ययनरत थीं।

उत्तराखंड में भौगोलिक परिस्थितियां विषम हैं। छात्राएं कालेज दूर होने कारण नियमित महाविद्यालय नहीं जा पाती हैं, ऐसे में मुक्त विश्वविद्यालय श्रेष्ठ माध्यम है। सुगम होने की वजह से पारिवारिक और सामाजिक बाधाएं भी नहीं होती है। अधिक पंजीकरण होने की वजह है। - प्रो. डिगर सिंह फर्स्वाण, निदेशक, शिक्षाशास्त्र विद्या शाखा

जिन महिला विद्यार्थियों को पूर्व में प्रवेश लेने में कठिनाई होती थी उनके लिए यूओयू सुलभ माध्यम बन रहा है। महिलाएं अपने पसंदीदा पाठ्यक्रमों के साथ विशेषज्ञता की उपाधि प्राप्त कर रही हैं। प्रवेश प्रक्रिया जारी है और इच्छुक विद्यार्थी प्रवेश ले सकते हैं। - प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, कुलपति, यूओयू