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हल्द्वानी, जेएनएन : वीर नारी तुलसी देवी के जज्बे व हिम्मत को सलाम। ससुर के बाद पति ने भी देश सेवा करते-करते शहादत दे दी। पति की मौत से बदले हालात के बावजूद तुलसी अपने दोनों बेटों को भी देश सेवा के लिए सींचती रही। दोनों बेटों ने भी सेना ज्वाइन कर मां के सपने को पूरा किया। अब तुलसी पोते को भी सेना में भेजने का सपना देख रही हैं।

अल्मोड़ा जिले के धौलीगाड़, सोमेश्वर में रहने वाले सैनिक दान सिंह दशकों पहले शहीद हो गए थे। उस समय उनके बेटे दलीप सिंह मात्र पांच साल व बेटी गीता सात साल की थी। कुछ समय बाद दान सिंह की पत्नी का भी निधन हुआ तो दोनों बच्चे अनाथ हो गए। चाचा ने दोनों बच्चों की परवरिश की। पिता की शहादत से प्रेरित दलीप सिंह वर्ष 1981 में कुमाऊं रेजीमेंट में भर्ती हो गए। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें 18वीं कुमाऊं में भेज दिया गया। पढऩे-लिखने में मेधावी दलीप सिंह परीक्षाएं पास कर सूबेदार के पद तक पहुंच गए। नौकरी लगने के एक साल बाद ही वर्ष 1982 में तुलसी देवी से उनका विवाह हुआ। वर्ष 2003 में सूबेदार दलीप की पलटन सियाचीन ग्लेशियर में तैनात थी। 10 अप्रैल 2003 को अचानक सीमा पार से हुए हमले में वह शहीद हो गए। उनकी पत्नी तुलसी ने बताया कि पति की शहादत के बाद उनके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए।

मुसीबत के दिनों में तुलसी के बड़े भाई सूबेदार आनंद सिंह भाकुनी ढाल बनकर साथ रहे। उन्होंने अपने दोनों बेटों को भी सेना में भेज दिया। उनके बडे बेटे कुंदन सिंह पिता की ही पलटन में व छोटा बेटा नवीन भी 18 कुमाऊं की अभिसूचना इकाई में तैनात है। वर्तमान में हल्द्वानी के नीलियम कालोनी में रहने वाली तुलसी देवी अब पोते को भी सैनिक बनाने का सपना देख रही हैं। वहीं पूर्व जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी मेजर बीएस रौतेला ने मंगलवार को वीरांगना तुलसी देवी से मुलाकात की। उन्होंने जिंदगी में आए उतार-चढ़ावों को साझा करने के साथ ही वीरांगना को सांत्वना भी दी है।

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Posted By: Skand Shukla

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