हल्द्वानी, जेएनएन : वन विभाग इन दिनों बाघ व हाथियों के रास्तों (कॉरीडोर) पर रिसर्च कर रहा है। इसमें देखा जाएगा कि वन्यजीव अपने पुराने रास्तों को बदल तो नहीं रहे। अगर ऐसा है तो उसकी वजह क्या है। दिसंबर तक यह शोध चलेगा। उसके बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार होगी। उच्च गुणवत्ता के कैमरों का इस्तेमाल इस प्रक्रिया में किया गया है।

वन्यजीव खासकर हाथी अक्सर एक जंगल से दूसरे में प्रवेश करने को पारंपरिक रास्तों का इस्तेमाल करता है। बाघ भी इसी राह पर चलता है। फॉरेस्ट एवं नेशनल मिशन ऑफ हिमालयन स्टडीज मिलकर उन नए रास्तों को चिन्हित कर रहे हैं। जिन्हें इन वन्यजीवों ने कुछ समय पूर्व ही आवागमन के लिए चुना है। वनाधिकारियों के मुताबिक रिसर्च पूरा होने पर पता चलेगा कि कॉरीडोर से नहीं गुजरने की वजह क्या होगी। अतिक्रमण व मानव का हद से ज्यादा उन मार्गों पर दखल मुख्य कारण तो नहीं। अफसरों की टीम के अलावा शोध से जुड़े छात्रों को भी इसमें लगाया गया है। कैमरा में टै्रप हुई हर चीज पर बारीकी से निगाह रखी जा रही है।

रिसर्च में शामिल कॉरीडोर

काडापानी कॉरीडोर, बूम कॉरीडोर, किलपुर-सुरई, नेपाल कॉरीडोर, नगला-किलपुरा, चिलका-कीटोन, रामनगर-बिजरानी, गौला कॉरीडोर, फतहेपुर गदगदिया आदि। वेस्टर्न सर्किल के साथ कार्बेट पार्क से जुड़ा हिस्सा भी इसमें शामिल है।

कॉरीडोर पर अतिक्रमण मुख्य वजह

वन्यजीवों के अपने रास्ते से भटकने की बड़ी वजह कॉरीडोर पर अतिक्रमण है। इनके आसपास आबादी की मौजूदगी बाघ-हाथी को पसंद नहीं। मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते मामले इस अतिक्रमण की देन है।

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Posted By: Skand Shukla