हल्द्वानी, जेएनएन : एनडीए की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद शनिवार को शहर के तीन होनहार युवा सेना के अफसर बन गए। दोनों के माता-पिता भी देहरादून में पासिंग आउट परेड में हिस्सा लेने पहुंचे थे।
हिम्मतपुर मल्ला निवासी रिटायर्ड सूबेदार भुवन चंद्र पाठक के बेटे यथार्थ पांडे सेना से जुड़ने वाले तीसरी पीढ़ी के होनहार युवा हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे यथार्थ ने दिल्ली के माउंट सेंट मेरी स्कूल से इंटर करने के बाद वर्ष 2014 में एनडीए की परीक्षा पास की। देहरादून स्थित आइएमए में तीन साल तक ग्रेजुएशन व ट्रेनिंग लेने के बाद यथार्थ शनिवार को पासिंग आउट परेड में शामिल हुए। इस खुशी के मौके के साक्षी माता-पिता के अलावा दादा-दानी भी बने हैं।
वहीं हल्द्वानी के अनुपम मिश्रा ने वर्ष 2014 में सेंट थेरेसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 95.8 प्रतिशत अंक से इंटर की परीक्षा पास की। इसी वर्ष अनुपम भारतीय सेना में टीइएस के तहत इंजीनिय¨रग के लिए चयनित हो गए। अनुपम ने मिलिट्री कॉलेज ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनिय¨रग सिकंदराबाद (हैदराबाद) से मैकेनिकल में बीटेक किया। अनुपम के दादा स्व. दयानंद मिश्रा क्षेत्र के अग्रणी समाजसेवी व नाना स्व. जयदत्त पंत नवभारत टाइम्स के समाचार संपादक रहे हैं। अनुपम के पिता गिरीश मिश्रा कंप्यूटर कंसलटेंट व माता वत्सला मिश्रा सेंट थेरेसा काठगोदाम में पीजीटी शिक्षिका हैं। अनुपम अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता व गुरुजनों को देते हैं। दोस्तों की कॉपी से सीखने वाले विपिन भारतीय सेना में चयनित हल्द्वानी : ठहरिया निवासी 17 वर्षीय विपिन जोशी भारतीय सेना में टेक्निकल एंट्री के लिए चयनित हुए हैं। विपिन के सफलता की खुशखबरी मिलते ही पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।

प्राइवेट स्‍कूल में सुरक्षा गार्ड हैं पिता
मूलरूप से चम्पावत जिले के देवीधुरा निवासी के पिता हीरा बल्लभ जोशी प्राइवेट स्कूल में सुरक्षा गार्ड के तौर पर कार्यरत हैं। माता कमला जोशी अचार फैक्ट्री में काम करती हैं। परिवार किराए के छोटे से कमरे में रहता है। विपिन की प्रारंभिक शिक्षा कुमाऊं बाल निकेतन गोरापड़ाव से हुई। बाद में सेंट लॉरेंस में दाखिल लिया। जहां से हाईस्कूल परीक्षा 81.7 प्रतिशत और फिर 86.6 प्रतिशत अंकों के साथ इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण की।

स्‍कूल की फीस देना भी था मुश्‍किल
दैनिक जागरण के साथ बातचीत में विपिन ने बताया कि सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने वाले पिता के लिए स्कूल फीस देना भी मुश्किल होता था। ऐसे में कभी भी उसने कोचिंग के बारे में नहीं सोची। हालांकि दोस्त लोग साथ में कोचिंग लेने की सलाह देते। विपिन ने ब्लैक बोर्ड खरीदा और उसी पर सवाल हल करना शुरू कर दिया। कठिन सवालों को कोचिंग करने वाले दोस्तों से पूछा करते और उनकी कॉपी लेकर सवालों को समझते। चचेरी बहन जया व आर्मी में सेवारत चचेरे भाई मनोज ने हमेशा मार्गदर्शन दिया। संघर्ष के बाद मिली कामयाबी से परिवार में खुशी का माहौल है। विपिन ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के संघर्ष व खुद की मेहनत को दिया है।

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