संवाद सहयोगी, कालाढूंगी : चार युद्धों में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले योद्धा आखिरकार बीमारी की जंग में हार गए। क्षेत्र के निकटवर्ती गांव देवलचौड़ निवासी सेवानिवृत कैप्टन लक्ष्मी दत्त पांडे का शुक्रवार की शाम उनके आवास पर निधन हो गया। वह 93 वर्ष के थे। एक माह से बीमार चल रहे थे। शनिवार को रानीबाग चित्रशिला घाट पर सैन्य सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की गई। उनके बड़े बेटे मोहन चंद्र पांडे ने अंत्येष्टि को मुखाग्नि दी। उनकी मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व सैनिक लीग ब्लॉक कोटाबाग के अध्यक्ष चंद्र शेखर कांडपाल ने बताया कि पांडे ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनको विशिष्ट सेवा मेडल की उपाधि से भी नवाजा गया। सूबेदार सत्यवान यादव, चंद्र शेखर कांडपाल, हयात सिंह, राजेंद्र प्रसाद, गोधन, प्रकाश, कृष्णा पांडे सहित सैकड़ों लोग अंत्येष्टि में पहुंचे। विशिष्ट सेवा मेडल से भी नवाजा

भारतीय सेना के जांबाज कैप्टन लक्ष्मी दत्त को सेना ने विशिष्ट सेवा मेडल से भी नवाजा था। वह भारतीय सेना के इंटेलीजेंस कोर में सूबेदार थे। उन्होंने 1939 (द्वितीय विश्व युद्ध), 1948 (पाकिस्तान के खिलाफ), 1962 (चीन के खिलाफ) व 1965 (पाकिस्तान के खिलाफ) के युद्ध में भाग लिया था और अपनी हिम्मत के आगे दुश्मनों को धूल चाटने के लिए मजबूर कर दिया था। इससे प्रभावित होकर तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी ने उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें पुरस्कृत किया था। नौकरी के दौरान उनके जोश और जज्बे को देखते हुए भारतीय सेना ने भी उन्हें कई बार सम्मानित किया था। आज उनके निधन के बाद पूरा क्षेत्र उनके शौर्य और जज्बे को याद कर उन्हें सलामी दे रहा है।

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