जागरण संवाददाता, रुद्रपुर : तराई के कद्दावर नेता व पूर्व कैबिनट मंत्री तिलकराज बेहड़ ने इस बार राजनीतिक वजूद बचाने की तलाश में किच्छा मैदान को चुना तो स्थानीय दावेदारों के विरोध के चलते उनके टिकट की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। चर्चा है कि यह मामला हाईकमान तक पहुंच गया है और वहीं से फैसला होगा। लगातार दो बार विधानसभा सीट हारे प्रत्याशी को दूसरी विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ाने के मूड में कांग्रेस नहीं दिख रही है। इसे लेकर तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
कांग्रेस नेता बेहड़ वर्ष, 2002, वर्ष, 2007 में रुद्रपुर से विधायक चुने गए थे और एनडी तिवारी की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री भी थे। पहली बार सपा प्रत्याशी राजेश शुक्ला को और दूसरी बार भाजपा प्रत्याशी राजेश शुक्ला को हराया था। वर्ष, 2012 में रुद्रपुर से किच्छा अलग होकर विधानसभा क्षेत्र बना तो यहां से लगातार दो बार भाजपा के राजेश शुक्ला चुनाव जीत चुके हैं। पिछले दो चुनाव में बेहड़ भाजपा के राजकुमार ठुकराल से हार चुके हैं। इस बार बेहड़ किच्छा से टिकट मांग रहे हैं। कुछ दिन पहले रायशुमारी करने रुद्रपुर आए थे तो किच्छा के स्थानीय दावेदारी करने वालों ने धरना देकर बेहड़ को टिकट न देने का विरोध जताया था। टिकट के लिए घमासान मचा है। हालांकि जसपुर से कांग्रेस विधायक आदेश चौहान, बाजपुर से पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और खटीमा से भुवन चंद्र कापड़ी को प्रतयाशी घोषित कर दिया गया, जबकि अन्य छह सीटों पर टिकट के लिए मारामारी मची है। टिकट के लिए लोग जुगाड़ लगाने में कोई कसर छोड़ रहे हैं।

कांग्रेस में किच्छा से डा. गणेश उपाध्याय, राजेश प्रताप ङ्क्षसह, संजीव ङ्क्षसह, नारायण बिष्ट, हरीश पनेरु सहित नौ लोग दावेदारी कर रहे हैं। चर्चा है कि दो दिन पहले दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से कहा कि स्थानीय नेता को पिछली बार टिकट नहीं दिया गया तो कांग्रेस को नुकसान हुआ। बाहरी लोगों को टिकट न दिया जाए, स्थानीय स्तर पर जिसे भी टिकट दिया जाएगा, उसे सब लोग एकजुट होकर चुनाव लड़ाया जाएगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डाक्टर गणेश उपाध्याय ने बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस के संगठन महामंत्री वेणुगोपाल से मुलाकात कर मामले से अवगत कराया गया तो उन्होंने कहा कि जो दो बार लगातार विधानसभा चुनाव हार चुका है, उसे नई विधानसभा क्षेत्र से नहीं लड़़ाया जा सकता है। बताया कि मामला हाईकमान तक पहुंच गया है। चर्चा है कि किच्छा सीट पर टिकट का फैसला राहुल गांधी ही कर सकते हैं। ऐसे में विरोध के चलते बेहड़ की टिकट को लेकर मुश्किलें बढ़ती जा रही है। हालांकि टिकट के बाद ही हकीकत का पता चल पाएगा।

Edited By: Prashant Mishra