हल्द्वानी, जेएनएन : प्रदेश में लागू लोकसभा चुनाव की आचार संहिता दो-तीन दिन के अंदर हट जाएगी। चुनावी कार्यक्रम के चलते छुटपुट काम से लेकर बड़े प्रोजेक्टों की अटकी फाइलों के अब दौडऩे की उम्मीद है। अभी तक संबंधित विभागों के अफसर आचार संहिता के कारण मंजूरी नहीं मिलने की बात कर जिम्मेदारी से बच रहे थे, लेकिन वे अब ऐसा नहीं कर सकेंगे। बहाने के बजाय उन्हें विभागीय कामों की गति बढ़ानी होगी।

कुछ बड़े काम जो अटके

आइएसबीटी :

वैसे यह मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है लेकिन सरकार नई जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर आचार संहिता की दुहाई दे रही थी। लंबे समय से अटके इस प्रोजेक्ट को लेकर अब तेजी दिखानी पड़ेगी।

मोटर ट्रेनिंग स्कूल :

गौलापार में आठ हेक्टेयर जमीन पर हाईटेक मोटर ट्रेनिंग स्कूल बनना है। करीब 16 करोड़ का बजट आंका गया था, पर स्वीकृति नहीं मिली। मामला केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय स्तर पर भी अटका है।

काठगोदाम-नैनीताल हाईवे का टेंडर :

इस हाईवे के चौड़ीकरण को लेकर पूर्व में जुटी कंपनी बीच में काम छोड़कर चली गई, जिससे सर्वे का पूरा काम प्रभावित हो गया। एनएच आचार संहिता हटते ही दोबारा से काम शुरू करवाएगा।

हाईवे के पेड़ ट्रांसप्लांट :

पंतनगर से काठगोदाम तक बन रहे हाईवे की जद में कुछ पेड़ आ रहे हैं। वन विभाग इन्हें काटने के बजाय ट्रांसप्लांट कराएगा। टेंडर होते ही प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जिससे पेड़ों को जीवनदान मिलेगा।

सड़कों की हालत सुधरेगी :

चुनाव से पूर्व लोनिवि ने सड़कों की मरम्मत को लेकर करोड़ों के बजट प्रस्ताव शासन को भेजे थे, पर स्वीकृति नहीं मिल सकी। बजट की स्वीकृति के साथ बारी-बारी से टेंडर कराकर काम हो सकेंगे।

रिंग रोड :

करीब एक हजार करोड़ की ङ्क्षरग रोड शहर का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसे सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल चुकी है। हालांकि बीच में इसके डिजायन को लेकर कुछ बदलाव किया गया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्वीकृति दिलाने की घोषणा भी की। बस सरकार को मजबूत पैरवी करनी होगी।

दो हाईवे का बाईपास :

पिछले साल अगस्त में प्रशासन ने तीनपानी एरिया में बाईपास बनाकर बरेली व रामपुर रोड पर ट्रैफिक दबाव कम करने की योजना बनाई थी। साढ़े 22 करोड़ का बजट शासन से मांगा गया। रकम मिलने पर अब काम शुरू हो सकता है।

जमरानी बांध :

हल्द्वानी का इसे सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना जाता है। 2584 करोड़ की इस योजना को केंद्रीय जल आयोग तकनीकी स्वीकृति दे चुका है। राज्य व केंद्र सरकार को मिलकर बजट देना है। पानी के संकट से उबारने को इसका निर्माण जरूरी है।

मुखानी फ्लाईओवर :

हाई कोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन इस मामले में सक्रिय हुआ था। लोनिवि ने फ्लाईओवर की संभावनाएं तलाशने के लिए कंपनी का चयन कर लिया है। आचार संहिता हटते ही कंपनी काम शुरू करेगी। सर्वे के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

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Posted By: Skand Shukla

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