पिथौरागढ़, जेएनएन : विगत तीन माह से नगर सहित सटे गांवों में आतंक का पर्याय बने गुलदार को शुक्रवार की रात्रि मार दिया गया है। नरभक्षी बनी मादा गुलदार के पंजों के नाखून और तलवे की गद्दी घिसी थी। उसकी उम्र छह से सात वर्ष आंकी जा रही है। वह विगत कई दिनों से भूखी थी। पिथौरागढ़ नगर से सटे पपदेव गांव में सक्रिय नरभक्षी गुलदार ने बीती दो अगस्त को गांव में ही एक मकान में घुस कर एक बच्चे नवीन को बुरी तरह घायल कर दिया था। इस घटना के बाद गुलदार गांव के आसपास ही मंडरा रहा था। इसके ठीक एक माह बाद गुलदार ने तीन सितंबर को पपदेव गांव में ही एक महिला किरन को मार डाला। इसी के साथ दहशत फैल गई।   जिसे देखते हुए वन विभाग ने गुलदार को नरभक्षी घोषित करने के लिए संस्तुति भेजी। इस पर मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक ने गुलदार को नरभक्षी घोषित किया।

नरभक्षी घोषित होने के बाद उसे मारने के लिए शिकारी तैनात किए गए। पौड़ी निवासी जॉय हुकिल उसकी तलाश में जुट गए। 14 सितंबर से शिकारी उसकी खोज में जुटे थे।  शिकारी के निर्देशन पर नरभक्षी बन चुके गुलदार को चिह्नित किया गया। विगत बीस दिनों में गुलदार ने शिकारी और वन विभाग को जमकर छकाया। गश्त के दौरान नजर तक नहीं आया। अलग-अलग स्थानों पर मचान बनाए गए। यहां तक की पपदेव गांव में एक मकान की छत पर अस्थाई मचान बनाया गया।

शुक्रवार की सायं क्षेत्र में कार्य कर रहे मजदूरों को पपदेव के पास गुलदार दिखा। जिसकी सूचना शिकारी और वन विभाग को दी गई। गुलदार के लिए शिकारी गांव में पहुंच गए। मध्य रात्रि साढ़े बारह बजे गुलदार नजर आया। उसे देखते ही शिकारी ने मोर्चा संभाल लिया। रात एक बजे रायफल से गोली चलाई गई जो गुलदार के सीने को पार करते चली गई और गुलदार ढेर हो गया। रात में ही गुलदार को वन विभाग के डाकबंगले में लाया गया।

सात-आठ दिनों से भूखी थी मादा गुलदार

नरभक्षी बन चुकी मादा गुलदार विगत सात आठ दिनों से भूखी था। पोस्टर्माटम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विद्यासागर कापड़ी, डॉ. मनोज जोशी और डॉ. सौरभ भट्ट ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उसके नाखून और तलवे की गद्दी घिसी हुई थी। पोस्टमार्टम के बाद उसके शव को जला दिया गया। इस दौरान गुलदार को देखने वालों का तांता लगा रहा। शिकारी जॉय हुकिल ने कहा कि इस क्षेत्र में चार-पांच गुलदार हैं। मारा गया गुलदार मादा है। उसके मारे जाने के बाद उसका जोड़ा नर गुलदार सक्रिय हो सकता है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में गुलदारों की संख्या बढ़ चुकी है।

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Posted By: Skand Shukla

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