रामनगर, संवाद सूत्र : तराई पश्चिमी वन प्रभाग का क्षेत्र लकड़ी चोरी व अवैध खनन के लिहाज से हमेशा संवेदनशील रहा है। उपखनिज व लकड़ी चोरी में पकड़े गए वाहनों से वन विभाग की झोली में राजस्व के रूप में लगभग 15 करोड़ रुपये आ गया।

तराई पश्चिमी वन प्रभाग में कोसी व दाबका नदी में उपखनिज व खैर, साल, सागौन, यूकेलिप्टस व अन्य मिश्रित प्रजाति की लकड़ी चोरी करने वाले गिरोह सक्रिय रहते हैं। वन विभाग इन वन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए छापामार कार्रवाई करता है, जिसमें वन विभाग वाहनों को पकड़कर उनसे जुर्माना वसूलता है। विभागीय कार्यालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक इन पांच सालों में उपखनिज व लकड़ी चोरी के मामलों में 1806 वाहन वन विभाग ने पकड़कर सीज किए हैं।

वर्ष 2016-17 से लेकर वर्ष 2020-21 मार्च तक वन विभाग ने 2757 वन अपराध दर्ज किए हैं। इसके अलावा 1806 वाहन पकड़े हैं। इसके अलावा 35 आरोपितों को वन विभाग पकड़कर जेल भी भेज चुका है। वन विभाग ने इन पांच सालों में 14.92 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूल किया है।

तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ बीएस शाही ने बताया कि अपै्रल से जून तक जुर्माना वसूली का यह आंकड़ा 15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वन विभाग सीज किए गए वाहनों के मामलों को निस्तारित करने के लिए कोर्ट लगाता है। कोर्ट में रेंजर व वाहन मालिक की सुनवाई के बाद आरोपित वाहन मालिकों पर जुर्माने की राशि अलग-अलग लगाता है।

वर्ष वाहन राजस्व रुपयों में

2016-17 306 1.30 करोड़

2017-18 428 1.38 करोड़

2018-19 402 3.88 करोड़

2019-20 322 4.34 करोड़

2020-21 348 3.17 करोड़

15 वाहनों का वन विभाग ने किया अधिग्रहण

वन विभाग ने सीज किए गए वाहनों में से 15 वाहनों को अब तक नहीं छोड़ा है। अवैध खनन व लकड़ी चोरी मेें पकड़े गए 15 वाहनों का वन विभाग ने अधिग्रहण कर लिया है।

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Edited By: Skand Shukla