जागरण संवाददाता, नैनीताल : स्वायत्त होने का दंभ भरने वाले स्थानीय निकाय और पंचायतें आर्थिक जरूरतें पूरी करने के लिए पूरी तरह राज्य सरकार तथा केंद्रीय व राज्य वित्त आयोग पर निर्भर हैं। निकाय व पंचायतों के कर्मचारियों को वेतन भत्तों के लिए शासन का मुंह ताकना पड़ता है। यही वजह है कि 15वें केंद्रीय वित्त आयोग की टीम के 17-18 अक्टूबर को प्रस्तावित दौरे को देखते हुए निकायों और पंचायतों के जिम्मेदार प्रस्ताव तैयार करने में जुटे हुए है।

दरअसल, शासन के बार-बार निर्देशों, दिशा-निर्देशों के बाद भी निकायों द्वारा आय के स्रोत बढ़ाने के रास्ते तलाशे नहीं गए। भवन कर, सफाई कर, पालिका, नगर पंचायत व नगर निगम की दुकानों का किराया आदि वसूलना निकायों की जिम्मेदारी है, मगर कर वसूली में हीलाहवाली जगजाहिर है। लापरवाही का आलम यह है कि निकायों की विभागों के साथ ही व्यक्तिगत स्तरों पर करोड़ों कर वसूली बकाया है। हर साल वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में वसूली के लिए अभियान चलते हैं, मगर फिर वित्तीय वर्ष समाप्ति के बाद मामला ठंडा पड़ जाता है। वोटबैंक ने बांधे हाथ

निकायों व पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने कभी आय के स्रोत बढ़ाने के गंभीर प्रयास नहीं किए। सियासी दलों अथवा निर्दलीय जनप्रतिनिधियों के कार्यकर्ता व समर्थकों के विरोध की वजह से किसी ने इच्छाशक्ति ही नहीं दिखाई। दूसरा मतदाताओं व समर्थकों की नाराजगी भांपते हुए हाथ बांध दिए गए। निवर्तमान अध्यक्ष ने तैयार की रिपोर्ट

पालिका के निवर्तमान अध्यक्ष श्याम नारायण ने वित्त आयोग की टीम के समक्ष शहर की जरूरतों से संबंधित प्रत्यावेदन तैयार किया है, जिसमें लोअर माल रोड, बलियानाला भूस्खलन, पथ प्रकाश व्यवस्था, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जीआइएस आधारित मास्टर प्लान, पार्किग निर्माण, अत्याधुनिक स्लाटर हाउस निर्माण आदि के लिए बजट मांगा गया है।

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