जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : नैनीताल जिले में लावारिस घूम रहे तीन पशुओं में लंपी वायरस (Lumpy Virus) के मामले सामने आए हैं। लेकिन इनके आइसोलेशन को लेकर अब तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में इस बीमारी के अन्य पशुओं में फैलने का खतरा बन हुआ है। अब इस मामले में एक गोसेवक ने अपनी गोशाला को देने की सहमति जताई है। इसलिए व्यवस्थाओं को लेकर पशुपालन विभाग ने नगर निगम को पत्र भेजा है।

शहर में लावारिस पशुओं का आतंक बना हुआ है। जिस वजह से कई जगह पर वाहन चालकों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में कई बार नगर निगम से समस्या को दूर करने की मांग की गई पर अधिकारी आंखें मूंद कर बैठे रहे। अब इन पशुओं ने लंपी वायरस फैलने का खतरा बढ़ा दिया है।

पशुपालन विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्सािधिकारी डा. आरके पाठक के मुताबिक शहर में तीन गोवंशीय पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण दिखाई दिए हैं। जिनका उपचार कुछ गोसेवकों की मदद से किया जा रहा है। जो लगभग रिकवर होने वाला है। लेकिन इन पशुओं के घूमंतु होने के कारण बीमारी के अन्य पशुओं में फैलने का खतरा बना हुआ है।

इसके लिए गोसेवक जोगेंद्र राणा ने अपनी निर्माणाधीन गोशाला को आइसोलेशन कार्य में प्रयोग करने की सहमति दी है। इस संबंध में नगर निगम के अधिकारियों से व्यवस्था को लेकर पत्र भेजा गया है। नगर निगम के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी डा. मनोज कांडपाल ने बताया कि यह गोशाला ऊंचापुल में है। जिसका शुक्रवार को सहायक अभियंता निरीक्षण करेंगे। जिसके बाद जगह के हिसाब से बजट और अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी।

रोग नियंत्रण के उपाय

  • - लंपी स्किन डिजीज से प्रभावित पशुओं को अलग रखें
  • - बीमारी ग्रस्त पशु की मृत्यु होने पर शव को खुला न छोड़ें
  • - प्रभावित पशुओं में बकरी पाक्स वैक्सीन का प्रयोग करें
  • - इम्युनिटी बढ़ाने के लिए मल्टी विटामिन जैसी दवाएं दी जाएं

लंपी स्किन डिजीज के लक्षण

पशु के शरीर का तापमान 106 डिग्री फारेनहाइट होना, पशु को कम भूख लगना, पशु के चेहरे, गर्दन, थूथन, पलकों समेत पूरे शरीर में गोल उभरी हुई गांठें दिखने लगती हैं। फेफड़ों में संक्रमण के कारण निमोनिया हो जाता है। पैरों में सूजन, लंगड़ापन, नर पशु में काम करने की क्षमता कम हो जाती है। चिकित्सकों का अनुमान है कि इस रोग के फैलने की आशंका 20 प्रतिशत है और मृत्यु दर पांच प्रतिशत तक है।

Edited By: Skand Shukla